आगरा। ट्रांस यमुना थाने में एक नाबालिग के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने उसे बरामद कर आरोपी को पकड़ लिया। परिजनों का आरोप है पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, उसे छोड़ दिया। इसके बाद आरोपी दबंगई दिखाते हुए नाबालिग का फिर से अपहरण करके ले गया है।
ट्रांसयमुना क्षेत्र निवासी एक महिला की तहरीर पर पुलिस ने 29 अक्तूबर को अपहरण और आपराधिक साजिश की धारा के तहत मुकदमा लिखा। मुकदमे में कृष्णा बाग, टेढ़ी बगिया निवासी फरमान और मुवीना को नामजद किया। आरोप लगाया कि 16 वर्षीय बेटी घर से जेवरात और हजारों का कैश भी ले गई है। अपहरण 26 अक्तूबर को हुआ था। तीन दिन बाद मुकदमा लिखा गया। उसके लिए भी पीड़ित पक्ष को अधिकारियों के पास जाना पड़ा था। मुकदमे के बाद पांच नवंबर को किशोरी को बराबद कर लिया गया। किशोरी के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपित फरमान को भी पकड़ा था। कुछ घंटे बाद बेटी को उनके सुपुर्द कर दिया। आरोपित को भी छोड़ दिया। पुलिस ने कहा कि जब मेडिकल और बयान होंगे तब बेटी को ले आना। उन्होंने पूछा कि आरोपित को क्यों छोड़ा तो पुलिस ने धमका दिया। आरोप है कि दूसरे दिन से ही आरोपित ने किशोरी के परिजनों को धमकाना शुरू कर दिया। उनसे कहा कि वे कोई कार्रवाई नहीं करा पाएंगे। उनकी लड़की उसके प्यार में पागल है। उसे दोबारा ले जाएगा। आरोपित बुधवार को किशोरी को दोबारा लेकर फुर्र हो गया। पीड़ित पक्ष थाने पहुंचा। पुलिस को जानकारी दी तो पुलिस ने कहा कि खोज रहे हैं। बेटी को संभालकर रखते। वह अपनी मर्जी से जाती है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपित ने किशोरी के भाई से बाइक भी छीन ली थी। उसे भी ले गया है। इधर सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि किशोरी को बरामद करने के बाद उसका मेडिकल और कोर्ट में 164 के बयान क्यों नहीं हुए? मुकदमे में नामजद आरोपित को पुलिस ने जेल क्यों नहीं भेजा? किशोरी के परिजनों को आरोपी फिर से उसे ले जाने की धमकी दे रहा था, पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की?











