आगरा। आगरा में राशन की कालाबाजारी को लेकर मुख्यमंत्री मंगलवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में काफी नाराज हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी से पूरा मामला पूछा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मामले में एडीएम की संलिप्तता थी, उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद अधिकारियों के बीच में खलबली मच गई है।
हाथरस की रहने वाली पीसीएस अधिकारी सुशीला अग्रवाल एडीएम नागरिक आपूर्ति पद पर आगरा में तैनात थीं। सुशीला के पति जो कि आगरा के रहने वाले हैं, वह हाथरस में एडीएम फाइनेंस के पद पर तैनात हैं। 10 सितंबर को तत्कालीन डीएम भानु चंद्र गोस्वामी के निर्देश पर डीएसओ संजीव सिंह ने पुलिस टीम के साथ अछनेरा स्थित रायभा में एक गोदाम पर छापा मारा था। 280 क्विंटल राशन का चावल और एफसीआई गोदाम की सरकारी मुहर लगी 62 बोरियां यहां से जब्त की गई थीं। गोदाम का संचालक खेरागढ़ स्थित पीपलखेड़ा निवासी सुमित अग्रवाल था, जो राशन माफिया बताता जाता है। इसके विरुद्ध चार से अधिक केस दर्ज हैं। वह अपने जीजा मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर चावल की कालाबाजारी का सिंडीकेट चला रहा था। सूत्रों से पता चला था कि सुमित अग्रवाल एडीएम नागरिक आपूर्ति सुशीला अग्रवाल के पति का रिश्तेदार था। जिसका फायदा उठाकर वह बेखौफ होकर पिछले दो साल में जिले का सबसे बड़ा राशन माफिया बन गया। इसके सिंडिकेट में 100 से अधिक लोग शामिल थे। राशन माफिया से मिलीभगत के आरोप में एडीएम को शासन से आदेश आने के बाद आगरा से हटा दिया गया था। उन्हें राजस्व विभाग से संबद्ध किया गया है। इधर जिलाधिकारी के यह भी संज्ञान में आया था कि एडीएम नागरिक आपूर्ति सुशीला अग्रवाल का अर्दली गौरव शर्मा कोटेदारों से लेकर राशन की कालाबाजारी करने वालों से वसूली करता था। 13 सितंबर को डीएम ने गौरव शर्मा को निलंबित किया था। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के जिला अधिकारी और कप्तानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इसमें उन्होंने आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी से कालाबाजारी वाले मामले को लेकर पूछा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आगरा में एक महिला एडीएम अधिकारी थी, उसकी इसमें संलिप्तता थी। उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उन्होंने निर्देश दिए हैं।











