आगरा। “होली के रंग हमें प्रेम और स्नेह से सराबोर करते हैं और ऐसे में यदि हम रासायनिक रंगों से होली खेलते हैं तो यह प्रेम तकलीफ में बदल जाता है। आवश्यकता है हम पारंपरिक और अपने घर में बने हुए ऑर्गेनिक रंगों से ही होली खेलें और इस पर्व को सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाएं।” यह कहना है आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रो आरके श्रीवास्तव का। वह एनसीसी आर्मी विंग आगरा कॉलेज द्वारा आयोजित “ऑर्गेनिक होली के सुरक्षित रंग” विषय पर आयोजित संभाषण में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान कंपनी कमांडर कैप्टन अमित अग्रवाल ने वर्तमान समय में होली के दौरान प्रयुक्त किए जाने वाले रासायनिक रंगों से होने वाले नुकसान के बारे में कैडेट्स को सचेत किया। उन्होंने कहा की घातक रसायनों से बने रंगों द्वारा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हम घर में ही विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ, जड़ी बूटियों, फूलों, सब्जियों आदि से प्राकृतिक रंग बना सकते हैं। उन्होंने विभिन्न रंगों में उपस्थित रसायन एवं उनसे होने वाले रोगों के बारे में बताया कि
काले रंग में उपस्थित लैड ऑक्साइड से गुर्दे में तकलीफ होती है। हरे रंग में कॉपर सल्फेट होता है, जिससे आंखों में एलर्जी और अन्य तकलीफ होती है। सिल्वर रंग में एल्युमिनियम ब्रोमाइड होता है जो कैंसर का कारक होता है। नीले रंग में प्रूशियन ब्लू होता है जो त्वचा रोग उत्पन्न करता है। लाल रंग में उपस्थित लेड सल्फाइट त्वचा का कैंसर करता है।डा भूपेंद्र सिंह ने होली के पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान कृति, हिमांशी, निशांक, हृदय, आदि कैडेट्स ने भी अपने विचार व्यक्त किए। यूओ तमन्ना परमार ने किया।सांचालन प्रतीक खंडेलवाल, जाह्नवी सिसोदिया, अदिति उमा शर्मा, प्रियंका वर्मा, संजना, खुशी, दिव्यांशी, विशाल रावत आदि ने होली के लोक गीत प्रस्तुत किए। इस अबसर पर डा. संध्या अग्रवाल, कैडेट प्रमोद कटेनिया, आकाश सोलंकी, भारतेंदु, राजकुमार आदि कैडेट्स उपस्थित रहे।











