आगरा। एक तरफ पुलिस कमिश्नर विभाग की छवि सुधारने के लिए दिन-रात जोर दे रहे हैं। उनके यह निर्देश हैं कि पीड़ित की एफआईआर तत्काल दर्ज कर कॉपी उसके घर पर पहुंचाई जाए। वहीं दूसरी ओर कुछ थानों में अभी भी पुलिस कर्मियों की अपनी मनमर्जी चल रही है। आलम यह है कि चोरी के साक्ष्य होने के बाद भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक पीड़ित ढाई महीने से कोतवाली थाने के चक्कर काट रहा है। सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित ने अल्पसंख्यक आयोग से न्याय की गुहार लगाई है।
गालिबपुरा के रहने वाले नजीर की कोतवाली की पन्नी गली, तिलक बाजार में जमजम कैटर्स के नाम से दुकान है। नजीर के पुत्र खुबैब ने बताया की छह दिसंबर 2023 की रात उनकी दुकान के ताले तोड़ कर चोर अंदर घुसे थे। चोर दुकान से स्टील का गल्ला चोरी कर ले गए थे। गल्ले में 65 हजार रुपये और उनके अन्य दस्तावेज थे। उन्होंने पाय चौकी पुलिस और 112 नंबर पर फोन कर जानकारी दी थी। तत्कालीन चौकी प्रभारी पवन कुमार ने गली में लगे सीसीटीवी चेक किए तो चोर सामान लेकर बाइक से जाते दिखाई दिए थे। कार्रवाई न होने पर 20 दिसंबर को पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। पीड़ित का आरोप है कि चौकी प्रभारी बदल गए। नए प्रभारी अरुण कुमार ने जांच पूर्व प्रभारी पर ही होने की बात कही। दारोगा पवन कुमार ने चोरों की पहचान होने का दावा किया। मुकदमा दर्ज होने पर कोर्ट के चक्कर लगने की बात कही। उन्होंने चोर को पकड़कर रुपये वापस कराने का आश्वासन देकर कोई कार्रवाई न चाहने की बात लिखवा ली।इसके बाद भी अभी तक चोर नहीं पकड़े गए हैं।पीड़ित ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष से खुद के अल्पसंख्यक होने के कारण कार्रवाई न होने की लिखित शिकायत की है।










