आगरा। उटंगन नदी में डूबने वाले 13 लोगों में से सात लोग शनिवार शाम तक भी नहीं मिले हैं। ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद थी कि शनिवार को गायब लोग मिल जाएंगे, लेकिन शाम 6:45 बजे तक उनकी उम्मीद टूटी हुई थी। हालांकि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ सेना भी शनिवार सुबह से सभी की खोज में लगी हुई है। पानी का बहाव एक तरफ से कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदी में पानी का बहाव रोकने के लिए अस्थाई बांध बनवाकर पानी को निकलवाया जा रहा है। इसके लिए मिट्टी से भरे कट्टे लगाए जा रहे हैं। मिट्टी भी डाली जा रही है, जिससे पानी का बहाव एक तरफ से कम हो जाए। जेसीबी से भी पानी निकाला जा रहा है।
शनिवार सुबह से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ सेना भी मोर्चा संभाले नजर आई।

सुबह से ही भारी संख्या में लोगों की भीड़ भी जुट गई।

भाजपा जिला अध्यक्ष प्रशांत पौनिया भी सुबह 7:00 बजे ही मौके पर पहुंच गए और शाम तक लोगों के बीच में बैठे रहे। वह लोगों को जानकारी देते रहे। पुलिस और प्रशासन पूरी तरीके से मदद करने में जुटा हुआ है। सेना की 50 पैरा फील्ड यूनिट के 411 पैरा फील्ड यूनिट के 19 सदस्य ऑपरेशन कर रहे हैं। सात जवान ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर नदी में तलाश कर रहे हैं। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल बचाव कार्य में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

पांच लोगों के मिल चुके हैं शव
बता दें कि हादसे में कुसियापुर गांव के पांच परिवारों ने अपने चिराग खो दिए हैं, वहीं अन्य डूबे हुए युवकों की तलाश जारी है। हर घर से रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। पुरुष स्तब्ध खामोशी में आंखें नम किए हुए हैं। बच्चों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि ऐसा हादसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। गांव के लोग लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। मगर, किसी के पास सांत्वना के शब्द नहीं थे। चारों ओर सिर्फ आंसुओं और दर्द की नदी बह रही है। शनिवार को गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला।











