आगरा। ताजमहल में 369 वां उर्स मंगलवार से शुरू हो गया। अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने उर्स के विरोध में सिद्धि मेहताब बाग पर गंगा जल चढ़ाकर जलाभिषेक किया और शिव चालीसा का पाठ शुरू किया।
ताजमहल के उर्स को लेकर अखिल भारतीय हिंदू महासभा पिछले कई दिनों से विरोध कर रही है। महासभा ने कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद सोमवार को एएसआई को भी ज्ञापन दिया। कोर्ट ने आयोजन समिति को नोटिस दिया और पूछा कि किसकी अनुमति से उर्स का आयोजन किया जाता है। आरटीआई में एएसआई द्वारा यह जानकारी दी जा चुकी है कि उर्स के लिए न तो मुगल, न अंग्रेज और न ही भारत सरकार की तरफ से कोई अनुमति है। महासभा के नेता संजय जाट ने बताया कि अदालत ने दो दिन में नोटिस का जवाब मांगा था। जवाब दिया गया या नहीं, इस बारे में उनके वकील पता कर रहे हैं। अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई चार मार्च को होनी है। ताजमहल में तीन दिन तक चलने वाले उर्स में तीनों दिन अलग-अलग रस्में अदा की जाती है। गुस्ल, संदिल और चादरपोशी की जाती है। कव्वाली होती है। मुशायरा होता है। पूरे साल में सिर्फ एक बार शाहजहां और मुमताज के उर्स पर ताजमहल तहखाने के भीतर मौजूद असली कब्र आम लोगों के लिए खोली जाती है। छह और सात फरवरी को दोपहर दो बजे के बाद, जबकि आठ फरवरी को पूरा दिन एंट्री फ्री रहती है। अंतिम दिन ही चादरपोशी की जाती है। इस साल 1560 मीटर की चादर चढ़ाई जाएगी। आठ फरवरी तक लाखों पर्यटक और आम जनता ताजमहल में मुख्य कब्रों को देख सकेंगे। इस साल 1560 मीटर की चादर कब्रों पर चढ़ाई जाएगी।











