-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन कब्जाने को लेकर रची गई साजिश में पुलिस और आबकारी टीम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि यह विवेचना शासन के आदेश पर सीबीसीआईडी आगरा सेक्टर को ट्रांसफर हो गई है। आगरा में यह विवेचना एसआईटी ने की थी। यह आधी अधूरी थी। एसआईटी ने तत्कालीन एसओ सहित 15 के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था, लेकिन गांजा और शराब में निर्दोषों को जेल भेजने वालों को बचा लिया था। वह निष्पक्ष विवेचना ना कर लीपापोती में जुटी हुई थी।
बता दें कि बोदला के पास 50 करोड़ से अधिक की जमीन पर जनवरी में कब्जे की साजिश रची गई थी।तत्कालीन डीजीपी से शिकायत हुई थी। आरोप लगाया गया था जमीन पर केयरटेकर के रूप में रहने वाले पांच लोगों को गांजा और शराब में जेल भेजा गया। दो मुकदमे लिखे गए। उसके बाद जमीन पर रातों रात कब्जा करा दिया गया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही निकले थे। कथित मालकिन उमा देवी की तहरीर पर डकैती की धारा में मुकदमा लिखा गया था। बाद में उमा देवी भी फर्जी निकली थी। फर्जी वारिसान और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर जमीन की मालकिन बनने की साजिश रची थी। पुलिस ने इस साजिश में शामिल आरोपियों को भी जेल भेजा था। विवेचक ने बिल्डर और उसके बेटे, पुरुषोत्तम पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, एसआईटी के निर्देश पर बिल्डर किशोर बघेल, अमित अग्रवाल, आनंद जुरैल, नेम कुमार जैन को डकैती, कब्जे सहित अन्य धारा में आरोपी बनाया था। वहीं तत्कालीन एसओ जितेंद्र कुमार को आपराधिक साजिश का आरोपी बनाया गया था। उमा देवी, धर्मेंद्र, रवि कुशवाहा, शंकरिया, मोहित उर्फ किशन कुमार, राजू को धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में आरोपी बनाया गया था। सभी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। विवेचना प्रचलित रखी गई थी।
कई माह एसआईटी के निर्देशन में चली जांच में कई सवालों के जवाब नहीं मिले थे। एसआईटी लीपापोती करने में जुटी हुई थी। वह उन सवालों के उत्तर खोजना ही नहीं चाह रही थी जिनके उत्तर उसे खोजना चाहिए थे। पुलिस आखिर किस दबाव में जमीन पर कब्जा कराने को तैयार हुई थी? कितने रुपये में डील हुई थी? गांजा और शराब कहां से आई थी? पुलिस महकमे में चर्चा है कि इस मामले में अभी भी पर्दे के पीछे से कोई ठोस पैरवी कर रहा है। इसलिए विवेचना सीबीसीआईडी ट्रांसफर हुई है। अब देखने वाली बात यह होगी विवेचना कितने समय चलेगी। विवेचना में निष्कर्ष क्या निकलेगा। सीबीसीआईडी की विवेचना में किसे क्लीनचिट मिलेगी। किसे आरोपित बनाया जाएगा। शराब और गांजा लगाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसान बनवाने में शामिल सरकारी कर्मचारी आरोपित बनेंगे या नहीं।
सीबीसीआईडी के एसपी राजेंद्र कुमार ने बताया कि सीबीसीआईडी आगरा सेक्टर में विवेचना इंस्पेक्टर अनिल प्रताप सिंह को आवंटित की गई है। विवेचना में सभी पहलुओं को देखा जाएगा। एक-एक घटनाक्रम को देखा जाएगा। सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
गांजे वाली विवेचना को दरोगा अमित धामा कई महीने से लटकाए पड़ा रहा
जमीन कांड में सबसे पहला मुकदमा अगस्त 2023 में जगदीशपुरा थाने में लिखा गया था। विवादित भूखंड पर दबिश देकर गांजा बरामद किया गया था। रवि कुशवाह, संकरिया कुशवाह और ओमप्रकाश को जेल भेजा गया था। अक्तूबर में पुलिस ने उसी जगह दबिश देकर शराब पकड़ी थी। रवि की पत्नी और बहन को जेल भेजा गया था। सवाल उठा था कि जहां पहले गांजा बिकता था वहां तीन महीने में अवैध शराब का धंधा शुरू हो गया। पुलिस बेखबर थी। आखिर क्यों। शिकायत के बाद पुलिस अधिकारियों ने दोनों मुकदमों को साजिश का हिस्सा माना था। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम निलंबित हुई थी। गांजे और आबकारी वाली विवेचना अभी तक लंबित चल रही है। आबकारी वाली विवेचना में तो कुछ विवेचक बदल भी गए, लेकिन गांजे वाली शुरू से ही अवधपुरी चौकी प्रभारी अमित धामा के पास रही। चर्चा है कि कई महीने बीतने पर भी वह विवेचना में दो ही पर्चे काट पाए हैं। पहले पर्चे में विवेचना ग्रहण की गई है। इधर अधिकारियों के आदेश पर विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष लोहामंडी कुशल पाल सिंह को ट्रांसफर हो गई थी, लेकिन फिर से यह अमित धामा के पास ही तत्काल वापस आ गई थी। अमित धामा ने दूसरा पर्चा यह काट दिया कि यह विवेचना कुशल पाल सिंह के पास चली गई है और दूसरी बार में लंबे समय तक विवेचना ग्रहण ही नहीं की। दरोगा की होशियारी को देख उसे और बड़ी चौकी तोहफे में दे दी गई है।











