-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। एक युवक ने आगरा कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी कि लोन लेकर उसने पुलिस को रिश्वत दी, उसके बाद उसे थाने से छोड़ा गया। युवक पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए लगातार चक्कर काट रहा है। आरोप है कि उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। रिश्वत के मामले को भी आखिर आगरा कमिश्नरेट में गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है।
भाजपा सरकार भ्रष्टाचार को लेकर बेहद सख्त है। लेकिन आगरा कमिश्नरेट में थाने- चौकी का बुरा हाल है। आगरा कमिश्नरेट में अभी तक कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं लेकिन अभी तक एक भी मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि पूर्व एसएसपी प्रभाकर चौधरी के समय में भ्रष्टाचार के मुकदमे दर्ज कराए गए थे। उनके जाने के बाद वह बंद हो गए। इसके चलते पुलिस निरंकुश हो गई। अब तो ऐसे भी मामले सामने आये हैं जहां पुलिस ने लोगों को थाने में बंद कर जेल भेजने की धमकी देकर बैनामा कराया और पीड़ितों के खिलाफ ही उल्टा मुकदमा दर्ज किया गया।
अब जो ताजा मामला सामने आया है उसमें बनवारी नाम के युवक ने शिकायत की है कि 14 अक्टूबर को उनके पास देहरादून से उनके बड़े भाई का फोन आया था। उन्होंने बताया था कि गांव में पिताजी व महिलाओं के साथ कुछ लोगों ने मारपीट कर दी है। बनवारी आगरा शहर में रहते हैं। उन्होंने यही से 112 नंबर पर कॉल कर दिया और वह रुनकता चौकी पर भी पहुंच गए। आरोप है कि रुनकता चौकी प्रभारी ने कोई भी सुनवाई नहीं की। इसके बाद उन्हें पकड़कर थाने भिजवा दिया गया। आरोप है कि वहां पर इंस्पेक्टर ने डराया धमकाया और कहा कि दो-चार केस लगाकर तुम्हें जेल भेज दूंगा। छोड़ने के लिए पैसे की डिमांड की। पिता ने 10 हजार किसी से उधार लिए। छोटे भाई ने थाने में ही 20 हजार का क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया और अपने दोस्त के अकाउंट में पैसे भेजे। दोस्त एटीएम से निकाल कर थाने में पैसे लाया। एक महिला कांस्टेबल को 30 हजार देने के बाद उन्हें छोड़ा गया। बनवारी का कहना है कि थाने के सीसीटीवी कैमरे के सामने ही उनके भाई ने क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था। यह सीसीटीवी कैमरे में कैद है। अधिकारी चेक करेंगे तो रिश्वत की पोल खुलकर सामने आ जाएगी। इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि उन्होंने जब आईजीआरएस पर शिकायत की तो चौकी प्रभारी ने उसे जमीनी विवाद की बात कहकर मामले का निस्तारण कर दिया। चौकी प्रभारी को बनवारी ने मैसेज किया कि उन्होंने ऐसा कैसे लिख दिया उसका उन्हें रिप्लाई नहीं मिला। बनवारी का कहना है कि पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई के लिए वह लगातार चक्कर काट रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बनवारी का कहना है कि रिश्वत लेने के बाद भी उनका शांति भंग में चालान कर दिया गया है। इधर मामले में एसीपी ताज सुरक्षा सैयद अरीब अहमद का कहना है कि वह मामले की जांच कर रहे हैं। अभी दो-चार बयान रह गए हैं। एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट सौंप देंगे।











