आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में बीती परीक्षाओं के दौरान केंद्रों में जमकर धांधली हुई थीं। एक ही मैनेजमेंट के कॉलेज आपस में केंद्र बना दिए गए थे। इसके साथ ही जिन डिग्री कॉलेजों में इंटर पास लोग प्राचार्य बने हुए थे, वह भी केंद्र बना दिए गए थे। शासन ने केंद्रों में हुई धांधली को गंभीरता से लिया है। विशेष सूत्रों की मानें तो केंद्रों की धांधली की जांच को जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। जिलाधिकारी के निर्देशन पर जांच शुरू हो गई है। विवि से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। इधर जांच शुरू होने के बाद अधिकारियों व केंद्र बनाने वाली समिति के पसीने छूटे हुए हैं। अपने को कैसे बचाया जाए यह रास्ते खोजे जा रहे हैं।
बता दें कि विवि ने सेमिस्टर परीक्षाओं में केंद्रों में बड़े पैमाने पर धांधली की थी। जियो टैगिंग का मखौल उड़ाया गया। केंद्र 80 किलोमीटर दूर तक बनाए गए। इसके साथ ही एक जिले का केंद्र दूसरे जिले में डाल दिया गया था। जिन कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरा नहीं था। वह भी केंद्र बना दिए गए थे। शासन तक जब यह बात पहुंची तो वह हैरान हो गया। शासन द्वारा विवि के अधिकारियों से जांच न कराकर जिलाधिकारी से जांच कराई जा रही है। क्यों कि शासन के संज्ञान में आया है कि यहां बड़े स्तर के अधिकारी केंद्रों की धांधली में संलिप्त हैं।
इधर जांच शुरू होने के बाद अधिकारियों के बीच में खलबली मची हुई है। विशेष सूत्रों की मानें तो प्रशासन ने अपनी ओर से जारी पत्र में विवि प्रशासन से पूछा है कि वर्ष 2022 की कराई गई सेमिस्टर परीक्षाओं में केंद्र बनाने के लिए बनाई गई समिति के सदस्यों के नाम उपलब्ध कराएं। यह समिति किसने बनाई थी। यह भी बताएं। विवि ने कितने कॉलेजों की जियो टैगिंग कराई थी? क्या एक ही मैनेजमेंट के कॉलेजों को आपस में केंद्र बनाया जा सकता है? केंद्रों के आपस के बीच की दूरी कितनी होनी चाहिए? परीक्षाओं के दौरान कितने कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे और कितनों में नहीं चले? विवि इन बिंदुओं पर क्या जवाब दे। यह सोचकर परेशान है।











