आगरा। आगरा कमिश्नरेट में एक थाने के इंस्पेक्टर के व्यवहार और कार्यशैली से अधीनस्थ पुलिसकर्मी बहुत तनाव में हैं। कई का तो इंस्पेक्टर की बातों को सुनने के बाद बीपी बढ़ जाता है। वह अधिकारियों के सामने हाथ पैर जोड़ रहे हैं कि साहब इंस्पेक्टर साहब के साथ हम काम नहीं कर पाएंगे। हमें किसी भी खराब थाने में भेज दीजिए लेकिन इनसे पीछा छुड़ा दीजिए।
शहर के एक बड़े थाने में पुलिस कमिश्नर ने इस सोच के साथ एक इंस्पेक्टर को नियुक्त किया कि वह व्यवहार कुशल हैं और उन्हें पुलिसिंग का अनुभव भी है। इसके साथ ही पुराने एक्टिव इंस्पेक्टर की भरपाई भी वह कर देंगे। इधर चार्ज लेते ही इंस्पेक्टर ने किसी न किसी बात को लेकर पुलिसकर्मियों के साथ में अभद्रता करना शुरू कर दिया। जिनका काम पूर्व में अच्छा रहा है, जिनकी वजह से आईजीआरएस निस्तारण में थाना पहले नंबर पर आया है, उनकी भी क्लास ले ली। इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों पर भी अपने खराब शब्दों के तीर चलाए। थाने के पुलिसकर्मी इंस्पेक्टर की कार्यशैली से इतना परेशान हो गए हैं कि कुछ के तो आपस में बात करते हुए आंसू आने लगे हैं। वह कह रहे हैं कि अभी तक की नौकरी में ऐसे इंस्पेक्टर साहब नहीं देखे जो बात-बात में गाली देते हैं। इंस्पेक्टर साहब का ड्राइवर तो डीसीपी सिटी साहब के सामने फूट-फूट कर रोया। बोला साहब मुझे हटा दो नहीं तो मार डालेंगे। डीसीपी सिटी साहब ने उसका मनोबल बढ़ाया और कहा कि अब आपको कोई परेशानी नहीं होगी। ड्राइवर ने कहा कि इंस्पेक्टर साहब बात कम करते हैं, गालियां ज्यादा देते हैं, उनके उत्पीड़न से बहुत तनाव में हूं। आखिर कहां से कमा कर लाकर दूं। ड्राइवर के अलावा थाने का एक जीडी मुंशी जीडी पर तस्करा डालकर थाने से चला गया। डीसीपी सिटी ने उसे भी वापस किया है। मुंशी का कहना था कि साहब कद में छोटे जरूर हैं लेकिन सम्मान के साथ समझौता नहीं है। इनके साथ काम करने से अच्छा है इस्तीफा दे दिया जाए। एक महिला पुलिसकर्मी भी बहुत परेशान है। वह भी अधिकारियों के सामने कभी भी पेश हो सकती है। इंस्पेक्टर साहब के कारनामे पुलिस कमिश्नर तक भी पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने भी उनकी डांट लगाई है लेकिन फिर भी इंस्पेक्टर साहब पर कोई असर नहीं है। इसके साथ ही पहली बार यह भी देखा गया है कि कोई भी इंस्पेक्टर अपने ही विभाग के इंस्पेक्टर के लिए भला बुरा कह रहा है। वह भी उस इंस्पेक्टर के लिए जिसकी बेहतर पुलिसिंग की वजह से उसकी वर्दी पर कई मेडल लगे हो। अधिकारी भी उसकी कार्य शैली के दीवाने रहे हो।











