आगरा। 30 हजार का लोन लेकर सिकंदरा थाने को रिश्वत दिए जाने के मामले में शनिवार को आखिरकार शिकायतकर्ता को बयान के लिए बुलाया गया। शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने पैसे दिए हैं। महिला कांस्टेबल के हाथ में पैसे दिए हैं।
बनवारी नाम के युवक ने शिकायत की है कि 14 अक्टूबर को उनके पास देहरादून से उनके बड़े भाई का फोन आया था। उन्होंने बताया था कि गांव में पिताजी व महिलाओं के साथ कुछ लोगों ने मारपीट कर दी है। बनवारी आगरा शहर में रहते हैं। उन्होंने यही से 112 नंबर पर कॉल कर दिया और वह रुनकता चौकी पर भी पहुंच गए। आरोप है कि रुनकता चौकी प्रभारी ने कोई भी सुनवाई नहीं की। इसके बाद उन्हें पकड़कर थाने भिजवा दिया गया। आरोप है कि वहां पर इंस्पेक्टर ने डराया धमकाया और कहा कि दो-चार केस लगाकर तुम्हें जेल भेज दूंगा। छोड़ने के लिए पैसे की डिमांड की। पिता ने 10 हजार किसी से उधार लिए। छोटे भाई ने थाने में ही 20 हजार का क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया और अपने दोस्त के अकाउंट में पैसे भेजे। दोस्त एटीएम से निकाल कर थाने में पैसे लाया। एक महिला कांस्टेबल को 30 हजार देने के बाद उन्हें छोड़ा गया। बनवारी का कहना है कि थाने के सीसीटीवी कैमरे के सामने ही उनके भाई ने क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था। यह सीसीटीवी कैमरे में कैद है। अधिकारी चेक करेंगे तो रिश्वत की पोल खुलकर सामने आ जाएगी। इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि उन्होंने जब आईजीआरएस पर शिकायत की तो चौकी प्रभारी ने उसे जमीनी विवाद की बात कहकर मामले का निस्तारण कर दिया। डेढ़ महीने से शिकायतकर्ता पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। खबर प्रकाशित होने के बाद शनिवार को उसे बयान देने के लिए बुलाया गया। शिकायतकर्ता ने इस बात के प्रमाण दिए कि रिश्वत देने के लिए भाई ने क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था। भाई का दोस्त अपने एटीएम से रुपये निकालकर आया था। कोई व्यक्ति रात दो बजे एटीएम से रुपये निकालकर थाने क्यों आएगा। पुलिस ने रुपये मांगे थे। इसलिए उन्होंने इसका इंतजाम किया था। वे दोषी तो उनके खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं लिखा गया। शांतिभंग में चालान क्यों नहीं किया गया। वह गांव में नहीं रहता उसके बावजूद पाबंद क्यों किया गया। यह रकम पुलिस को दी जानी थी। ताकि वह और उसका भाई छूट सकें। इधर एसीपी ताज सुरक्षा सैयद अरीब अहमद का कहना है कि जल्दी ही वह मामले की रिपोर्ट डीसीपी को सौंप देंगे।











