-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। करोड़ों की जमीन पर कब्जे के मामले में रक्षक से भक्षक बने पुलिस वालों के खिलाफ कब मुकदमा दर्ज होगा और वह कब जेल जाएंगे। यह सवाल पीड़ितों की ओर से खड़े किए जा रहे हैं। जेल गए बेगुनाहों की आंखों में आंसू हैं और जुबां पर दर्द। बेगुनाह अपनी इस सजा के लिए भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। रवि कुशवाह के साथ उसके भाई संकरिया कुशवाह और चौकीदार ओमप्रकाश ने जो 102 दिन जेल में गुजारे। वह जब उस मंजर को सोचते हैं तो उनकी रुह कांप जाती है।
बता दें कि बोदला-जगदीशपुरा मार्ग पर बीएस कॉम्पलेक्स के पास दस हजार वर्ग गज जमीन पर जगदीशपुरा थाना पुलिस ने कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे लिखे। इनमें पुरुषों व महिलाओं को जेल भेज दिया। रास्ता साफ होने के बाद पुलिस ने करोड़ों की जमीन पर कब्जा करा दिया। आगरा कमिश्नरेट में कोई सुनवाई नहीं होने पर पीड़ितों ने डीजीपी कार्यालय में शिकायत की। वहां से एक एसपी जांच के लिए आगरा आए और मौके पर गए। एसपी को जांच करता देख पुलिस अधिकारियों के पसीने छूट गए। इसके बाद तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार सहित चार पुलिसकर्मियों को शुक्रवार रात को निलंबित किया गया।
तारीख पर आए रवि ने आपबीती सुनाई तो फूटकर रोया
रवि कुशवाह शनिवार को दीवानी तारीख करने गया था। आखिर क्या हुआ था यह पूछते ही वह फूट-फूटकर रोने लगा। बोला पुलिस जल्लाद है। कहने लगा वह गरीब है उसकी सबसे बड़ी सजा यही है। किसी ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी। दबंग जैसा चाहते गए पुलिस करती गई। पहले भाइयों को जेल भेजा। जमीन पर कब्जा संभव नहीं हुआ तो पत्नी और बहन भी शराब तस्करी में जेल भेज दीं। रवि ने बताया कि 26 अगस्त की शाम का समय था। वह बच्चों को ट्यूशन छोड़कर आया था। पुलिस वाले आए। उसे पकड़ लिया। थाने ले जाने लगे। बाहर उसका भाई संकरिया और चौकीदार ओमप्रकाश मिले। उन्हें भी जीप में बैठा लिया। उसका स्कूटर भी साथ ले गए। उन पर गांजा तस्करी का आरोप लगाया। देर रात तीनों को पुलिस बिचपुरी रोड पर लेकर गई। वहां कोई कार से आया। उसने दो पैकेट पुलिस वालों को दिए। पुलिस ने उनके पास से तीन पैकेट में नौ किलोग्राम गांजा बरामद दिखाया। वीडियो बनाया। दूसरे दिन उन्हें जेल भेज दिया गया। वह गिड़गिड़ाते रहे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। रवि ने बताया कि मौके से बरामद स्कूटर उसका है। पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा बढ़ाने के लिए उसके स्कूटर पर टिर्र्री की नंबर प्लेट लगाई।
रवि बोला- जेल में धमकी मिली थी बात मान लो, जमीन खाली कर दो
रवि ने बताया कि जेल में उन पर दबाव बनाया गया। एक दिन उसके मामा की लड़की और रिश्तेदारों के साथ एक पहलवान मिलने के लिए आया था। बहन ने उससे कहा कि पहलवान की बात मान लो। जमानत हो जाएगी। पहलवान ने कहा कि जमीन खाली कर दो। जमीन से नहीं हटे तो उसकी पत्नी भी शराब में जेल जाएगी। हुआ भी ऐसा ही जब बात नहीं मानी तो पत्नी को जेल भेज दिया।
मां के साथ 51 दिन जेल में रहा मासूम बच्चा
पुष्पा ने बताया कि वह रवि की सगी बहन है। वह विधवा है। भाई जेल गया तो पूनम घर पर अकेली रह गई थी। वह भाभी के पास रहने चली गई। दिनभन पूनम भागती रहती। रोज बदमाश धमकाने आते थे। नौ अक्तूबर की रात वह खाना बना रही थी। पूनम भी वहां थी। एक दर्जन से अधिक लोग आए। उन्हें पकड़ लिया। थाने ले जाने लगे। उनसे कहा कि वे शराब की तस्करी करती हैं। दूसरे प्रदेश की शराब बेचती हैं। वे रोईं, हाथ-पैर जोड़े। किसी का दिल नहीं पसीजा। पुलिस पूनम के साथ उसके तीनों बच्चों को भी थाने ले गई थी। पता नहीं कहां से शराब आई। उनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया। जेल भेज दिया। पूनम का तीन साल का मासूम बच्चा भी जेल गया। वह बच्चे के साथ जेल में रोजाना रोती रहती थी। भगवान से प्रार्थना करती थी उसकी मदद करें। डीजीपी ने उसकी सुन ली और एसपी को जांच के लिए भेज दिया।
पहला मुकदमा पुलिस ने गांजा तस्करी का लिखा। आरोपियों को उस जगह से पकड़ा दिखाया जिस पर कब्जा हुआ। उसी जगह से शराब बरामद दिखाई। सवाल यह उठ रहा है कि जिस महिला का पति और देवर जेल चला गया, वह उसी जगह शराब का अवैध धंधा कर रही थी! जिस समय गांजा पकड़ा गया उस समय पुलिस को शराब क्यों नहीं मिली! दबंग लगातार जमीन पर आकर उसे धमका रहे थे। पूनम कुशवाह ने 16 सितंबर को अधिकारियों से भी शिकायत की थी। शिकायत पर्ची वायरल हो रही है। यह प्रार्थना पत्र पता नहीं कहां दब गया।
पांच साल की नौकरी पर एक बार निलंबित, एक बार लाइन हाजिर को बनाया थानाध्यक्ष

आगरा। जिस थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार को निलंबित किया गया है। वह 2015 बैच का है। 31 अगस्त 2017 को ज्वाइनिंग मिली। चर्चाएं है कि शुरुआत नौकरी में ही उसका जगनेर से शिकायतन पिनाहट तबादला हुआ। यहां से यह खराब कार्यशैली को लेकर लाइन हाजिर हो गया। इसके बाद उसे रुकनता चौकी प्रभारी बना दिया गया। यहां से भी यह निलंबित हुआ। फिर यह टोल चौकी प्रभारी बन गया। वहां से बरहन थाने चला गया। बरहन से नगर जोन उसका तबादला हो गया। नगर जोन में आने पर तत्कालीन डीसीपी विकास कुमार ने उसे एसएसआई ट्रांस यमुना बनाया लेकिन उसने वहां ज्वाइन नहीं किया। 24 घंटे में ही उसे पुलिस कमिश्नर ने थानाध्यक्ष जगदीशपुरा बना दिया। यहां उस पर महिला दरोगा ने छेड़खानी के आरोप लगाया। महिला दरोगा डीसीपी सीटी और एसीपी के सामने फूटकर रोई। जितेंद्र कुमार पर फिर भी कार्रवाई नहीं की गई। महिला दरोगा से ही पूछा गया बताओ वहीं तुम्हें भेज देंगे। इसके बाद महिला दरोगा को दूसरे थाने में भेज दिया गया। एक युवती के आत्महत्या किए जाने के मामले में जब विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने थाना घेर लिया था तो थानाध्यक्ष थाना छोड़कर भाग गए थे। एसीपी ने स्थिति को संभाला था। इतना सब होने पर भी थानाध्यक्ष को नहीं हटाया जा रहा था। क्या उन्हें महत्वपूर्ण कामों के लिए भेजा गया था? अब तो यह बात चर्चाओं में छाई हुई है।
21 दिन में ही लगाई चार्जशीट
आगरा। पुलिस ने जो एनडीपीएस का मुकदमा दर्ज किया था, उसमें सिर्फ 21 दिन में ही चार्जशीट लगा दी। एक और जहां पुलिस आत्महत्या करने वाली युवती के चार से पांच महीने में भी 161 के बयान नहीं कर पाई थी। उसी जगदीशपुरा थाना पुलिस ने 21 दिन में ही चार्जशीट लगा दी। इससे साफ पता चलता है मामला रणनीति के तहत किया गया है।
सांसद ने सीएम को लिखा पत्र
मामले में सांसद राजकुमार चाहर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एडीजी आगरा जोन या कमिश्नर रितु माहेश्वरी से जांच को पत्र लिखा है। सांसद का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। सांसद ने आगरा कमिश्नरेट के अधिकारियों पर जांच के लिए भरोसा नहीं जताया है।
आबकारी टीम के खिलाफ भेजी रिपोर्ट
डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि गांजा बरामदगी के मुकदमे में शामिल पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया। शराब की बरामदगी का मुकदमा आबकारी निरीक्षक ने लिखाया था। उनकी टीम के खिलाफ आबकारी अधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई है। आबकारी टीम की भूमिका भी संदिग्ध है। उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
इन सवालों के जवाब मांग रहे पीड़ित
– जो नौ किलो गांजा पुलिस ने पीड़ितों पर शो किया है, वह कहां से आया था।
-भूखंड पर अवैध शराब का अवैध धंधा दिखाया गया। शराब, ढक्कन आदि सामान कहां से आया।
-महिलाओं के जेल जाने के बाद मौके पर पुलिस ने अपना ताला लगाया था। दो दिन में जमीन की बाउंड्री किसने कराई।
-डीजीपी कार्यालय मामला पहुंचने के बाद कार्रवाई क्यों की गई। पहले क्यों मामला दबाया गया।











