आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति, कुलसचिव, उप कुलसचिव, अधीक्षक सम्बद्धता विभाग और मथुरा पटल प्रभारी के द्वारा जानबूझकर कूटरचित दस्तावेज पर कॉलेज को एनओसी दे दी गई। जबकि दस्तावेज कूटरचित होने की शिकायत उनके पास थी। यह आरोप लगाते हुए एक अधिवक्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां सभी के खिलाफ परिवाद दाखिल कर दण्डित करने को प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर मामले में 29 अप्रैल तक जांच कर आख्या मांगी है। भविष्य में कुलपति सहित अन्य अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कृष्ण गोपाल ने अपने अधिवक्ता राजेश रावत सिंह के द्वारा कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा है कि मथुरा के श्री लोकमणि शर्मा महाविद्यालय ने जमीन के फर्जी खसरा नंबर दिखाकर विश्वविद्यालय से कई कोर्सों की मान्यता ले रखी है। महाविद्यालय ने खसरा संख्या 26/1, 26/2 पर सशर्त एन.ओ.सी प्राप्त करके विश्वविद्यालय से बीए, बीएससी, बी.कॉम की मान्यता खसरा संख्या 26 पर प्राप्त की है। जबकि महाविद्यालय का निर्माण उपजिलाधिकारी मांट की आख्या 29 मई 2021 और 01 जनवरी 2024 और महाविद्यालय के प्रबन्धक के डब्लू.एस के अनुसार खसरा संख्या 26/3 पर किया गया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि इस संबंध में विश्वविद्यालय में भी कई बार शिकायत की गई थी फिर भी महाविद्यालय के निर्माण की बेदखली को सिविल वाद के लम्बित रहने के दौरान सशर्त एनओसी पर सशर्त मान्यता को विधिक नियमों का उल्लंघन करते हुए लगातार रिन्यू किया जा रहा है। उन्होंने प्रार्थना पत्र में कहा है कि महाविद्यालय द्वारा सशर्त एन.ओ.सी प्राप्ति वाले खसरा नंबर और महाविद्यालय निर्मित वाले खसरा नंबर की आबादी भी दर्ज नहीं कराई है। यहां तक की महाविद्यालय द्वारा सशर्त एन.ओ.सी प्राप्ति वाले खसरा नंबर 26/ 1, 26/2 की खतौनी वर्तमान में अस्तित्व में नहीं है। इसके बावजूद महाविद्यालय को विश्वविद्यालय द्वारा सशर्त मान्यता प्रदान को प्रतिवर्ष रिन्यू किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में इस बात की शिकायत की गई थी लेकिन फिर भी शिकायत का विधिवत निस्तारण न करके अवैधानिक कृत्य में अपनी संलिप्तता को दर्शा दिया। कुलपति को भी शिकायत पत्र दिया गया था, लेकिन उन्होंने भी कोई सुनवाई नहीं की। विश्वविद्यालय के द्वारा अनुचित लाभ दिलाने के उद्देश्य से मान्यता दी गई है। उन्होंने प्रार्थना पत्र में कहा है कि लोक सेवक होते हुए ऐसा कृत्य करके अपने पदीय कर्तव्यों का न्यायोचित निर्वहन न करके इस प्रकार कार्यलोप किया जाना दंडनीय अपराध है। वादी के द्वारा कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, कुलसचिव राजेश कुमार, उप कुलसचिव पवन कुमार, अधीक्षक संबद्धता विभाग अरविंद गुप्ता, पटल प्रभारी गवेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई कर दण्डित करने की मांग की है। सीजेएम ने मामले में कुलाधिपति से जांच कर 29 अप्रैल तक आख्या मांगी है।











