आगरा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने डिजिटल एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव एवं विशेष दूत अमनदीप सिंह गिल जी के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सहभागिता की। इस बैठक में डिजिटल तकनीक के वैश्विक विस्तार, उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बदलते स्वरूप से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस संवाद में तकनीकी विकास को अधिक व्यापक बनाने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी सहयोग को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रहे।
बैठक के दौरान विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों में डिजिटल तकनीक के विकास एवं विस्तार में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ अधिक से अधिक देशों तक पहुंचाने और तकनीकी विकास की संभावनाओं को व्यापक बनाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आज डिजिटल तकनीक शिक्षा, संचार, प्रशासन, आर्थिक गतिविधियों और नवाचार सहित अनेक क्षेत्रों में बदलाव का माध्यम बन रही है। ऐसे में विभिन्न देशों के बीच तकनीकी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तीव्र विकास से उत्पन्न संभावनाओं, चुनौतियों और जोखिमों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने तकनीकी क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोले हैं, वहीं इसके जिम्मेदार उपयोग, संभावित जोखिमों और प्रभावों को समझना भी आवश्यक हो गया है। इस संदर्भ में एआई के विकास को वैश्विक जरूरतों के अनुरूप समझने और तकनीकी प्रगति के साथ जिम्मेदारी तथा सावधानी को महत्व देने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। राज्यसभा सांसद नवीन जैन की इस बैठक में सहभागिता संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर डिजिटल तकनीक और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े विषयों पर हो रहे अंतरराष्ट्रीय संवाद का हिस्सा रही। भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल होना वैश्विक स्तर पर तकनीकी विकास, डिजिटल सहयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य से जुड़े विषयों को समझने का अवसर रहा। वर्तमान समय में डिजिटल नवाचार केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक विकास की दिशा को भी प्रभावित कर रहा है। डिजिटल साधनों की उपलब्धता, तकनीकी क्षमताओं का विस्तार और विभिन्न देशों के बीच सहयोग भविष्य की विकास प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के संदर्भ में डिजिटल तकनीक के विकास और विस्तार से जुड़ा संवाद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे तकनीकी प्रगति के अवसरों और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचार करने का अवसर मिलता है।










