आगरा। सोने के धागे से बुना गया तानाबाना जब आकार लेता है तो वो संसार का सर्वश्रेष्ठ नूमना जरदोजी कहलाता है। ऋग्वेद में जिस कला का उल्लेख है, देवता जिस कला से सजे वस्त्र धारण करते थे, आगरा की ऐसी प्राचीन कला को आगरा के साथ-साथ विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से आगरा विरासत फाउंडेशन द्वारा ज़रदोज़ी हमारी धरोहर, हमारी विरासत का आयोजन बुधवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में किया गया।
समारोह का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने किया। केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल ने आगरा की जरदोज़ी कारीगरी को विश्व में पहचान दिलाने की प्रतिबद्धता जताई। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता चौहान, महापौर हेमलता दिवाकर, एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ, एडिशनल सीपी संजीव त्यागी, अभिनव मौर्या, मधु बघेल और फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. रंजना बंसल भी उपस्थित रहीं।
रैम्प पर दिखा जरदोजी का जलवा
डिजायनर राखी कौशिक, अग्रज जैन, अलर्क लाल, कीर्ति खंडेलवाल, सुकीर्ति मित्तल, हिमानी सरन, रेणुका डंग, पूनम सचदेवा के निर्देशन में रैम्प पर ज़रदोज़ी की रचनात्मकता की छाप लिए परिधानों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई। जिसमें रनवे सीक्वेंस में डिजायनर्स के एक से एक बेहतरीन कलेक्शन को मॉडल्स ने खूबसूरती के साथ पेश किया। चंद्रमोहन सचदेवा, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. जयदीप मल्होत्रा आदि ने भी रेम्प पर अपनी प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं। ग्लेम प्रोफेशनल्स द्वारा शिवानी मिश्रा के निर्देशन में हुए मॉडल्स के मेकअप और कपिल पंजाबी की कोरियोग्राफी को दर्शकों ने सराहा।
प्रदर्शनी में दिखा ज़रदोज़ी का ऐश्वर्य
समारोह स्थल गणेशी लाल एंपोरियम, कोहिनूर ज्वेलर्स, शम्स क्रिएशन, मॉडलीजेंट ने ज़रदोज़ी कारीगरी से बने परिधान बैग, कालीन एवं सजावटी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई। 5 वर्षों की कड़ी मेहनत से शम्स क्रिएशन द्वारा रेशम और सोने के धागों से बना हाथी समूह लोगों के बीच ख़ास आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं जरदोजी की कढ़ाई का एक विशाल मास्टरपीस था जोकि 10 वर्षों की अथक साधना का परिणाम था। प्रदर्शनी स्थल पर शहर के कारीगर अपनी कारीगरी का सजीव प्रदर्शन कर रहे थे।











