आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के कार्यालय अधीक्षक सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ एससी-एसटी कोर्ट में परिवाद दर्ज हुआ है। आरोप है कि इन चारों ने एक अनुबंधित अनुसूचित शिक्षक से जाति सूचक शब्द बोले और मारपीट की। इसके साथ ही उसे जान से मारने की धमकी भी दी। एससी एसटी एक्ट में परिवाद दर्ज होने के बाद चारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
डॉ. अनिल कुमार ने कोर्ट में अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि वह विश्वविद्यालय में पर्यावरण अध्ययन विभाग में कार्यरत थे। उन्होंने उन्हें स्थाई करने और उनके अनुबंध को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रार्थना पत्र कुलाधिपति को दिया था। कुलाधिपति ने उसके निस्तारण के विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए थे। इसके क्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक कमेटी बनाई थी। जुलाई 2024 को जब अनिल कुमार आवासी इकाई के ऑफिस में अधीक्षक मधुसूदन कृष्ण पुत्र महेंद्र सिंह से मिलने गए तो वहां पर मधुसूदन ने उससे उसकी जाति पूछी। उन्होंने बताया कि वह जाटव समाज से आता है तो उस पर मधुसूदन कृष्ण भड़क गए और कहने बोले की कुर्सी से खड़ा हो। तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे बराबर में बैठने की। जब अनिल ने इस बात का विरोध किया तो वहां पर तैनात कनिष्ठ सहायक सौरव दुबे, शिवम सिंह, अमिता वर्मा और अन्य लोगों ने भी उनके साथ गाली गलौज की और हाथापाई भी। अनिल का आरोप है कि उससे कहा गया कि अगर दोबारा आया तो जान से मार देंगे। इस बात की शिकायत उसने पुलिस में भी की लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले में विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट ने अधीक्षक सहित चारों लोगों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में परिवाद दर्ज कर लिया है।











