-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में इस वर्ष भी सेंटर बनाने में नियमों की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। कुलपति ने दावा किया था कि जियो टैगिंग से सेंटर बनाने में दूरी की पारदर्शिता बरती जाएगी, लेकिन यह बात हवाई नजर आ रही है। सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि विवि प्रशासन को कुलाधिपति का भी डर नहीं है। जिस जियो टैगिंग का उन्होंने कुलाधिपति से उदघाटन कराया है, उसका भी उन्होंने मजाक बनाकर रख दिया है। यह सिर्फ नाम की साबित हो रही है किसी काम की नहीं?
विवि ने केंद्रों की सूची जारी कर दी है। सूची जारी करने के साथ ही आपत्ति भी मांगी गई हैं। इस बात को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि विवि एक बार में सही सूची जारी क्यों नहीं करता? हर बार तीन-चार बार में सूची क्यों जारी की जाती है? क्या ऐसा खेला करने के लिए किया जाता है?
इधर विवि ने दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति से जियो टैगिंग का उदघाटन कराया था। जियो टैगिंग का उद्देश्य यह है कि कॉलेज की पूरी वस्तुस्थिति के साथ उसकी लोकेशन भी विवि के सामने हो। अगर किसी कॉलेज का किसी दूसरे कॉलेज में सेंटर डाला जा रहा है तो दोनों की दूरी देखी जाएगी, जिससे शासन ने सेंटर बनाने के लिए जो निर्धारित किलोमीटर का मानक रखा है। वह पूरा हो जाए, लेकिन इस विवि में यह होता है कि कॉलेज वाले अपनी सुविधा के हिसाब से केंद्र डलवाते हैं। अगर उनके लिए 20 किलोमीटर दूर किसी कॉलेज में नकल का इंतजाम है तो वह वहां सांठगांठ कर सेंटर डलवा लेते हैं। विशेष सूत्रों की मानें तो विवि भी फील गुड करने के बाद मानक ताक पर रख देता है।
इस बार विवि जियो टैगिंग का कई दिनों से गाना रहा है। यह जियो टेगिंग केंद्रों की सूची जारी होते ही फेल नजर आई। उदारण के तौर पर टेड़ी बगिया स्थित भवानी सिंह कॉलेज का केंद्र शमसाबाद रोड स्थित श्री दाऊजी कॉलेज में डाला गया है, जबकि इस कॉलेज के चार-पांच किलोमीटर की रेंज में आरबी पीजी कॉलेज, सौदान सिंह महाविद्यालय, जगदंबा कॉलेज, लाल सिंह महाविद्यालय, मेघ सिंह महाविद्यालय, एसडी भदावर कॉलेज, आगरा वनस्थली महाविद्यालय, डॉ. डीवीएस कॉलेज आदि स्थित हैं। इन कॉलेजों में उसका केंद्र नहीं डालकर करीब 20 किलोमीटर दूर डाला गया है? ऐसा क्यों किया गया है। यह सवाल खड़े हो रहे हैं? इसमें जियो टैगिंग का पालन क्यों नहीं हुआ।
दूसरी ओर क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी कार्यालय के बराबर में पंचशील कॉलेज है। इस कॉलेज में सिर्फ एक कॉलेज का केंद्र डाला गया है, जबकि क्षमता यहां 1100 छात्रों की बताई जा रही है। विशेष सूत्रों का कहना है कि यहां ज्यादा कॉलेजों का केंद्र इसलिए नहीं डाला गया जिससे क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी छापा न मार दें। बीते साल जिस गणपति कॉलेज का यहां सेंटर डाला गया था। सूत्रों की मानें तो वह भी अपना केंद्र बदलवा ले गया है। इस कॉलेज का केंद्र विवि ने पंडित जगन्नाथ प्रसाद महाविद्यालय शमासाबद में डाला है। गणिपति कॉलेज से जगन्नाथ कॉलेज की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। यहां भी जियो टैगिंग फेल रही।
अव्यवस्थाओं वाले कॉलेज को फिर से बड़ा केंद्र बनाया
पूर्व में जिन कॉलेजों में अव्यवस्थाएं पकड़ी गई हैं। जहां छात्र-छात्राओं के बैठने तक उचित व्यवस्था नहीं थी। इस बार फिर उन्हें बड़ा केंद्र बना दिया है। ऐसे में केंद्रों की सूची पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुलपति ने कुलधिपति सामने बोला 934 कॉलेजों की जियो टैगिंग हो गई
कुलपति ने कुलाधिपति सामने दीक्षांत समारोह में बोला था कि 934 कॉलेजों की जियो टैगिंग कर दी गई है। क्या यही उनकी जियो टैगिंग थी कि 20 किलोमीटर दूर कॉलेजों का केंद्र डाला जाए। आखिर कुलाधिपति को गुमराह क्यों किया गया? यह सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
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भवानी सिंह कॉलेज और पंचशील कॉलेज परीक्षा केंद्र के संबंध में जो जानकारी मिल रही हैं उसका संज्ञान लिया जा रहा है। परीक्षा केंद्रों में जो सूची जारी की गई है। वह संभावित है। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण के लिए जियो टैगिंग की तकनीक का प्रयोग किया गया है। परीक्षा केंद्र की अंतिम सूची शुक्रवार को जारी कर दी जाएगी। विवि पारदर्शी रूप से परीक्षा केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
—प्रो. प्रदीप श्रीधर, पीआरओ
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विवि ने जियो टैगिंग का भी मजाक बनाकर रख दिया है। जब जियो टैगिंग हुई है तो दूर सेंटर कैसे बनाए गए हैं। कॉलेजों का भौतिक सत्यापन भी नहीं कराया गया। सेंटर बनाने में गड़बड़ी हुई है। औटा अध्यक्ष और महामंत्री धांधली की जांच कराएं।
—डॉ. मुकेश भारद्वाज, पूर्व औटा अध्यक्ष











