ऋषि चौहान
एटा। लाल रंग सुहाग का प्रतीक है। मसलन होठों की लाली, माथे की बिंदी, मांग का सिंदूर, लहंगा हो या साड़ी इसके बगैर तो दुल्हन का सिंगार नहीं होता। रेलवे के लिए यही लाल रंग खतरे का निशान होता है।
आज एक 70 वर्षीय महिला की सूझबूझ ने आज एटा टूंडला बरहन रेलवे ट्रैक पर बहुत बड़ा ट्रेन हादसा टाल दिया। गुलरिया गांव की 70 वर्षीय ओमवती गांव के निकट जानवरों को चरा रही थीं। इसी बीच महिला ओमवती ने रेलवे ट्रैक की पटरी टूटी हुई पाई। यह देख महिला घबरा गई। अचानक उसे याद आया कि वह लाल साड़ी पहने हुई है। फिर क्या था उस महिला के दिमाग में तेजी से काम करना शुरू किया। पहले तो उसने हवा में लाल साड़ी लहराई फिर। दो लकड़ियों से ट्रैक पर अपनी लाल साड़ी बांध दी। एटा से 8:00 बजे चली पैसेंजर ट्रेन का ड्राइवर ट्रैक पर लाल साड़ी बंधी देखकर खतरे को भांप गया और उसने ट्रेन रोक दी। इस तरह 70 वर्षीय महिला की सूझबूझ से आज एटा बरहन टूंडला मार्ग पर बहुत बड़ा ट्रेन हादसा होने से बच गया। जब इसकी सूचना नजदीकी जलेसर स्टेशन के मास्टर को मिली तब रेलवे को सूचना दी गई। सूचना पर रेलवे कर्मियों ने ट्रैक को सही कराया। डेढ़ घंटे तक इसी बीच ट्रेन रुकी रही। वृद्धा की सूझबूझ की ट्रेन में सवार सवारियां और क्षेत्र के लोग तारीफ कर रहे हैं।
महिला की है सूझबूझ इस बात का प्रमाण है कि टीवी मोबाइल रेडियो की वजह से लोगों में जागरूकता गांव तक भी पहुंच गई है। एक अनपढ़ महिला ओमवती ने 70 साल की उम्र में जो कर दिखाया। इसके लिए उसे रेलवे ही नहीं सरकार की तरफ से भी पुरस्कृत किया जाना चाहिए।











