आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के जिस बेस्ट प्रोफेसर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ है वह अभी फरार है। पुलिस की दो टीमें उसे खोजने में जुटी हुई हैं। पुलिस को अंदाजा है प्रोफेसर आगरा से बाहर कहीं चले गए हैं। उन्होंने अपना मोबाइल भी स्विच ऑफ कर रखा है। गुरुवार को छात्रा भी थाने में यह पूछने के लिए पहुंची कि आखिर आरोपी प्रोफेसर की गिरफ्तारी कब तक होगी। उसे हर हालत में न्याय चाहिए।
रसायन विज्ञान विभाग में तैनात इस प्रोफेसर को पिछले दीक्षांत समारोह में बेस्ट प्रोफेसर का विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलाधिपति से अवार्ड दिलाया है। एक शोध छात्रा ने उनके खिलाफ न्यू आगरा थाने में तहरीर दी थी। प्रोफेसर पर आरोप है कि दो साल तक शादी का झांसा देकर शोध छात्रा के साथ गलत काम किया। उसे खजुराहो और बरसाना के होटलों में ले जाकर दुष्कर्म किया। कार्यालय में बुलाकर छेड़छाड़ और मोबाइल तोड़ने की कोशिश की गई। धमकी दी कि मुंह खोला तो करियर बर्बाद कर दूंगा। उसने यह भी कहा कि मेरी पत्नी खूबसूरत नहीं है इसलिए तुमसे शादी करूंगा। साथ ही यह भी कहा कुलपति बनते ही तुम्हारी नौकरी भी लगाऊंगा। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छात्रा के 164 के बयान और मेडिकल करा दिया है। छात्रा का आरोप है कि मेडिकल के दौरान चिकित्सकों ने उस पर प्रेशर बनाया कि वह मेडिकल नहीं कराए। डॉक्टर ने उन्हें बहलाना शुरू कर दिया। कहा कि मेडिकल जांच में यह नहीं आएगा कि वह प्रोफेसर गिल्टी है। तुम्हारा नीचे का हिस्सा हमेशा के लिए खराब हो जाएगा। बहुत पेन होगा। तुम्हें इस लफड़े में नहीं पड़ना चाहिए। कोई फायदा नहीं। मूव ऑन करो। क्यों इस पचड़े में पड़ी हो? इसके बाद छात्रा को गुमराह करके उससे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए। छात्रा की एप्लीकेशन पर अब उसका दोबारा मेडिकल होगा। पुलिस भी छात्रा के साथ है। छात्रा का यह भी कहना है कि उस पर राजीनामा करने के लिए काफी दबाव बनाया जा रहा है। इधर प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर दो दिन विश्वविद्यालय ने आरोपी प्रोफेसर को निलंबित करने में लगा दिए। राज भवन ने भी मामले में जवाब मांगा है। कुलपति ने मामले में एक कमेटी भी बनाई है।
समाज विज्ञान संस्थान के जिस प्रोफेसर पर आरोप लगा था उन्हें भी बेस्ट प्रोफेसर का अवार्ड मिला था
आगरा। समाज विज्ञान संस्थान के एक प्रोफेसर पर भी दो साल पहले एक छात्रा ने शोषण के आरोप लगाए थे। हरीपर्वत थाने में तहरीर दी थी। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को रफा दफा करा दिया। सवाल यह भी खड़े हुए की अगर छात्रा गलत थी तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन प्रोफेसर को भी विश्वविद्यालय के बेस्ट प्रोफेसर का अवार्ड दिलाया गया था। एक अन्य प्रोफेसर को भी बेस्ट प्रोफेसर का अवार्ड दिलाया गया है। उनकी नियुक्ति की विजिलेंस जांच कर रही है। रसायन विज्ञान विभाग के जिस प्रोफेसर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ है वह विश्वविद्यालय में एक अधिकारी का खास बताया जाता है। अधिकारी का दो-तीन दिन से चेहरा उतरा हुआ है।











