आगरा। थाना इरादत नगर में दर्ज पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के एक मुकदमे में विवेचक एसीपी शमसाबाद इमरान अहमद का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने अपनी प्रतिकूल टिप्पणी वापस ले ली है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई फाइनल रिपोर्ट पर भी संज्ञान ले लिया है।
दरअसल न्यायालय ने इरादत नगर थाना पुलिस को मामले में अभियोग पंजीकृत करने का निर्देश दिया था। यह मुकदमा 17 मार्च 2026 को दर्ज हुआ, जिसकी विवेचना शुरुआत में तत्कालीन एसीपी शमसाबाद अमीषा को सौंपी गई थी। उनके स्थानांतरण के बाद यह जांच एसीपी मयंक तिवारी को आवंटित हुई। इसके बाद, उनका भी स्थानांतरण हो जाने पर 4 मई 2026 को विवेचना का अतिरिक्त चार्ज वर्तमान विवेचक एसीपी इमरान अहमद को मिला। नियमानुसार इस गंभीर मामले की विवेचना को 60 दिनों के भीतर निस्तारित किया जाना अनिवार्य था, जिसके लिए एसीपी इमरान अहमद ने कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की थी और गहन जांच के बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान विवेचक इमरान अहमद ने अदालत को स्पष्ट किया कि विवेचना के दौरान बार-बार जांच अधिकारी (विवेचक) बदलने और मामले की संवेदनशीलता के कारण साक्ष्य जुटाने की कार्यवाही में अतिरिक्त समय लगा। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस देरी का उद्देश्य किसी भी अभियुक्त को अनुचित लाभ पहुंचाना नहीं था, बल्कि वर्तमान विवेचक द्वारा पूरी तरह से गुण-दोष के आधार पर निष्पक्ष जांच कर फाइनल रिपोर्ट तैयार की गई है। इस दलील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एसीपी इमरान अहमद पर की गई अपनी प्रतिकूल टिप्पणी को वापस ले लिया। साथ ही अदालत ने भविष्य के लिए सभी विवेचकों को सख्त हिदायत दी कि वे चार्जशीट या एफआर को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही अदालत में दाखिल करें।










