आगरा। सपा संतों और भक्तों दोनों का ही अपमान करती है। जब वह सत्ता में थी उस समय राम भक्तों पर लाठी चार्ज किया गया और गोलियां चलवाईं। यह बातें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्टस इंडिया और यूजीआई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
कार्यक्रम से पूर्व उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत परिसर में पौधारोपण किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार समाज तथा सरकार के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। यदि सरकार कहीं कमी करती है तो उसे उजागर करना पत्रकारों का अधिकार है और यदि कोई अच्छा कार्य होता है तो उसे जनता तक पहुंचाना भी पत्रकारों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने संबोधन में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वर्ष 1972 से प्रारंभ हुई लगभग 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तय करने वाले नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के राष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित सभी पत्रकारों का वह अपनी पार्टी और सरकार की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन करते हैं।उन्होंने कहा कि भारतीय वैचारिक परंपरा में संगठन को हमेशा सरकार से बड़ा माना गया है। पत्रकारिता समाज और शासन के बीच संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि राजनीतिज्ञ, चिकित्सक, पुलिसकर्मी और पत्रकार ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें कार्यरत लोगों का दायित्व 24 घंटे का होता है और उन्हें किसी भी समय अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना पड़ सकता है। उपमुख्यमंत्री ने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पत्रकारों ने अनेक चुनौतियों का सामना किया था। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उसकी मजबूती में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की अवधारणा का समर्थन करते हुए कहा कि इससे समय, धन और संसाधनों की बचत होगी तथा विकास कार्यों को अधिक गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी और आम नागरिक भी इस विचार का समर्थन कर रहे हैं। बचत की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऊर्जा संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया और कहा कि ऊर्जा की बचत करके देश ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकता है।











