लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 2.0 ने अपना काम पूरी रफ्तार के साथ शुरू कर दिया है। फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 100 दिन के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। सभी मंत्रियों को अपने-अपने विभागों की समीक्षा के लिए कहा गया और कार्यों का मास्टर प्लान तैयार करने को कहा गया है। लेकिन साथ ही मुख्यमंत्री योगी खुद सरकार की कार्यप्रणाली के ढीले ‘पेंच’ भी कसने में जुट गए हैं। इसमें पिछली सरकार में सामने आई कई खामियों को भी दुरस्त किया जा रहा है। चाहे वह अफसरों को पीछे कर विभागों की बागडोर सीधे मंत्रियों के हाथ में देनी हो और अफसरों की भूमिका सहायक के रूप में तय करनी हो या फिजूलखर्ची, भ्रष्टाचार और नेताओं की मनमर्जी पर अंकुश लगाना हो। योगी धीरे-धीरे अपनी टीम और सरकार का रोडमैप दुरुस्त कर रहे हैं।
दरअसल यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान योगी सरकार के मंत्रियों, विधायकों और अफसरों में तालमेल की कमी की बातें सामने आई थीं। यही नहीं कई जिलों से खबरें आईं कि चुनाव जीतने के बाद विधायक और मंत्री अपने क्षेत्र में गए ही नहीं। इन्हीं नेताओं के चलते लोगों में रोष देखने को मिला और भाजपा को चुनाव में इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा। यही नहीं विभागों में जनता की सुनवाई पर भी बातें सामने आईं। इन्हीं सबको ध्यान में रखकर नई सरकार में कई नए फैसले देखने को मिल रहे हैं। अभी तक के फैसलों पर नजर डालें तो एक बात साफ है, मंत्रियों की मनमर्जी नहीं चलेगी, उन्हें अनुशासन के साथ अपने काम पर ध्यान देना होगा। उनके काम का आंकलन विभाग के प्रदर्शन के साथ ही उसके पब्लिक कनेक्ट, फिजूलखर्च में कटौती और खुद मंत्री के अनुशासित होने से किया जाएगा।
योगी सरकार में सबसे बड़ा फैसला ये है कि मंत्रियों को पुराने स्टाफ रखने की छूट नहीं दी गई है। इस बार मंत्रियों के निची सचिव, सहायक निजी सचिव, समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के पद पर सचिवालय प्रशासन ने तैनाती के लिए ऑनलाइन व्यवस्था अपनाई। इसमें पिछले 5 वर्ष इन पदों पर तैनात रहे 208 अधिकारियों को भी दोबारा अवसर नहीं दिया गया। करीब ढाई हजार अधिकारियों के पूल से ऑनलाइन आवंटन किए जाने से कौन-किस मंत्री के स्टॉफ में तैनात होगा, ये जानकारी तक किसी को नहीं थी। ऐसे में कोई जुगाड़ भी नहीं चल सका। दूसरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी मंत्रियों को 100 दिन का टारगेट दिया है। इस दौरान ये सभी अपने-अपने विभागों की विस्तृत समीक्षा करेंगे और उसके आधार पर योजना तैयार कर मास्टर प्लान बनाएंगे। उन्हें मुख्यमंत्री को बताना होगा कि वह अगले 100 दिन में क्या करेंगे? विभाग में नया क्या होगा? बता दें इससे पहले मुख्यमंत्री खुद सभी विभागों की लगातार समीक्षा करते थे और लेकिन अब मंत्रियों को अपने अधिकारियों के साथ समीक्षा करनी होगी। यही नहीं इस बार मुख्यमंत्री विभागों की लचर डिजिटाइजेशन पर भी बेहद सख्त हैं। सीधी हिदायत है कि विभागों के लिए डिजिटाइजेशन के काम को प्राथमिकता रहेगी ताकि जनता पारदर्शी तरीके से विभाग से लाभ ले सके।











