आगरा। आगरा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और वर्तमान प्राचार्य लगातार एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं। मंगलवार को वर्तमान कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. सीके गौतम ने कहा कि निलंबित प्राचार्य प्रो. अनुराग शुक्ला अपनी अक्षमता, गंभीर वित्तीय अनियमिताओं और अपनी नियुक्ति के फर्जी दस्तावेजों को छिपाने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
शासन के आदेश पर पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अनुराग शुक्ला निलंबित हुए हैं। इस आदेश के खिलाफ वह हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने आदेश को स्ट कर दिया गया है। बीते दिनों उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और प्राचार्य प्रोफेसर गौतम से अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा भी बताया है। इधर मंगलवार को प्राचार्य गौतम ने अपना पक्ष रखने के लिए पत्रकार वार्ता की। कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. सीके गौतम ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत कूटरचित दस्तावेज के आधार पर या झूठे तथ्य प्रस्तुत कर नियुक्ति पाता है तो यह आपराधिक कृत्य है। शासन को यह अधिकार है कि सक्षम एजेंसियों से उसकी जांच कराये और गलत पाए जाने पर शासन निलंबन सहित उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमें की करवाई भी कर सकता है।
उन्होंने कहा कि शासन की उच्च स्तरीय समिति ने प्रो. अनुराग शुक्ल से प्राचार्य पद के लिए आवश्यक उनकी शैक्षणिक अर्हताओं और संलग्न दस्तावेज़ों के सत्यापन एवं प्रमाणीकरण को साक्ष्य मांगे थे जिसे प्रो. अनुराग शुक्ल नहीं प्रस्तुत कर पाये थे।
शासन के आदेश में विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधान जिसमें यह व्यवस्था है कि निलंबित प्राचार्य के स्थान पर पहले तीन माह तक कॉलेज के शिक्षकों में किसी भी प्रतिस्थानी को प्राचार्य का प्रभार दिया जा सकता है। मुझे कार्यवाहक प्राचार्य का प्रभार दिया गया है।
प्रो. गौतम ने कहा कि निलंबन के बाद प्रो. अनुराग शुक्ल ने ऐसा प्रतीत होता है कि व्यक्तिगत दुर्भावना एवं द्वेष के कारण उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय के विरुद्ध अनर्गल आरोप लगाए और उन्होंने न केवल प्राचार्य के रूप में सेवा नियमावली का उल्लंघन किया है बल्कि शासकीय पदधारक मंत्री की अवमानना का कार्य किया है।











