आगरा। नगर निगम में 15 साल से नौकरी कर रहे 25 कर्मचारियों की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। नियुक्ति में हुई धांधली की शिकायत में सत्यता पाए जाने पर यह निरस्त की गई है। जिन कर्मचारियों की नियुक्ति निरस्त की गई है वे सभी कोर्ट के आदेश पर नौकरी कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2007-8 में सपा की सरकार थी। तत्कालीन नगर आयुक्त श्याम सिंह यादव ने मानकों के विपरीत 17 ड्राइवर, सात क्लीनर और एक फिटर को नियुक्ति दी थी। तत्कालीन मंडलायुक्त के आदेश पर तीन सदस्य कमेटी बनाकर जांच भी करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट में कमेटी ने लिखा था कि चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए पैसे लेकर गलत अंक दिए गए। दो सगे भाइयों को ड्राइवर बना दिया गया। जिस अभ्यर्थी को चयन समिति के सदस्य ने अनुपस्थित दर्शाया था उसे तत्कालीन नगरायुक्त श्याम सिंह यादव द्वारा 62 अंक दिए गए थे। समिति ने 15 बिंदु पर अपनी रिपोर्ट शासन में पेश की थी। इसके बाद वर्ष 2014 में सभी नियुक्तियां निरस्त कर दी गई। कर्मचारी कोर्ट चले गए और कोर्ट ने 15 साल की नौकरी के आदेश देते हुए कर्मचारियों को बहाल कर दिया। इसके बाद 2022 में शासन ने इन 25 कर्मचारियों की नियुक्ति को निरस्त किया था, लेकिन यह कोर्ट के आदेश पर नौकरी कर रहे थे। पिछले साल नगरायुक्त ने चयन समिति का गठन किया। चयन समिति ने शासन के आदेश और कोर्ट के निर्देश के आधार पर माना कि कर्मचारियों की नियुक्ति निरस्त कर दी जाए।











