आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सहित नौ लोगों के खिलाफ कोर्ट ने परिवाद के रूप में याचिका को दर्ज कर लिया है। अब इन सभी नौ लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इतिहास विभाग में तैनात रहे कर्मचारी वीरेश कुमार ने पूर्व कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल, प्रोफेसर अनिल वर्मा, प्रोफेसर यूसी शर्मा, प्रोफेसर संजय चौधरी, सहायक कुलसचिव पवन कुमार, अमृतलाल, मोहम्मद रईस, बृजेश श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। वीरेश ने आरोप लगाया था कि वह इतिहास विभाग में 23 वर्षों से कार्यरत था। प्रोफेसर अनिल वर्मा, मोहम्मद रईस ने उनसे कहा था कि बाहर रद्दी जल रही है। जरा देख आओ जली या नहीं जली। जब मैं मौके पर पहुंचा तो वहां मार्कशीट जल रही थीं। इसी दौरान यहां कुलपति पहुंच गए। साजिश के तहत मुझे मार्कशीट जलाने में फंसा दिया गया और मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। यही नहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे बहाल कराने के नाम पर 10 लाख रुपए रिश्वत मांगी गई। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। 2 सितंबर को तारीख दी गई है। इधर पूर्व कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल और कुछ प्रोफेसरों की विजिलेंस जांच भी शुरू हो गई है।











