आगरा। अदालत के आदेश का पालन नहीं करने पर अपर जिला जज महेश चंद्र वर्मा ने थानाध्यक्ष अछनेरा के विरुद्ध प्रकीर्ण (मिसलेनियस) वाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
अपर जिला जज महेश चंद्र वर्मा की कोर्ट में वर्ष 2017 का हत्या और सबूत नष्ट करने से संबंधित एक केस चल रहा है। इस मामले में मुख्य रूप से विवेचक जगदम्बा सिंह की गवाही लंबित थी। विवेचक लंबे समय से अदालत में हाजिर नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण अदालत ने उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। इन वारंटों और नोटिसों की तामील की जिम्मेदारी थानाध्यक्ष अछनेरा की थी। इंस्पेक्टर अछनेरा ने न तो वारंटों और नोटिसों की विधिवत तामील गवाह पर कराई, और न ही बिना तामील के वारंट या नोटिस अदालत में वापस भेजे। इस पर अदालत ने इंस्पेक्टर के कृत्य को कर्तव्य में लापरवाही और न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए उन्हें भविष्य के लिए सचेत किया था। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे न्यायालय द्वारा जारी सभी समन, नोटिस और अन्य अधिपत्रों की तामील नियमानुसार कराते हुए नियत तिथि पर न्यायालय में वापस करना सुनिश्चित करें, अन्यथा उनके विरुद्ध विधि अनुसार दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। इस चेतावनी के बावजूद, गवाह जगदम्बा सिंह के विरुद्ध पुनः जारी गैर-जमानती वारंट और नोटिस की तामील इंस्पेक्टर अछनेरा ने विधिवत नहीं कराई। बल्कि, उन्होंने गैर-जमानती वारंट पर यह कथन अंकित किया कि उन्होंने गवाह/विवेचक जगदम्बा सिंह से मोबाइल पर वार्ता की और गैर-जमानती वारंट एवं नोटिस को उनके मोबाइल पर भेजा। अपर जिला जज ने थानाध्यक्ष अछनेरा के इस कृत्य को गंभीर माना। अदालत ने कहा कि थानाध्यक्ष को तामील कराने का ज्ञान ही नहीं है। उनका यह कृत्य न्यायालय की अवमानना के साथ-साथ पुलिस अधिनियम की धारा 23/29 के तहत भी दंडनीय अपराध है। अदालत ने इंस्पेक्टर अछनेरा के विरुद्ध विधिक कार्यवाही हेतु प्रकीर्ण (मिसलेनियस) वाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, विवेचक जगदम्बा सिंह के विरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट और नोटिस की तामील को पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी सक्षम पुलिस अधिकारी के माध्यम से गवाह पर तामील कराएं।











