आगरा। सिकंदरा थाने के दरोगाओं ने ट्रक छोड़ने के नाम पर 20 हजार की रिश्वत ले ली। मामले में पुलिस कमिश्नर से शिकायत हुई है। पुलिस कमिश्नर के द्वारा डीसीपी लाइन से मामले की जांच कराई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट भी पुलिस कमिश्नर को सौंप दी है। संभावना है कि सिकंदरा थाने के दो दरोगाओं और एक कांस्टेबल पर निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।
आईपीएस प्रभाकर चौधरी के जाने के बाद आगरा में पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस कमिश्नर खुद क्राइम मीटिंग में यह कह चुके हैं कि उनके संज्ञान में आ रहा है कि आईपीएस प्रभाकर चौधरी के जाने के बाद भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ रही हैं। अगर उन तक मामला पहुंचा तो कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी पुलिस कर्मी अपनी कार्यशैली नहीं सुधार रहे हैं। मंगलवार को पुलिस कमिश्नर के सामने ताजगंज के रहने वाले ऋषभ परमार पेश हुए थे। उन्होंने बताया कि उनका ट्रक खराब होने पर चालक धर्मवीर उसे सही कराने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर ले गया था। वहां दुकान बंद होने के चलते ट्रक सही नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने चालक से बोदला सिकंदरा रोड से बिचपुरी आने के लिए कहा। सिकंदरा में चेकिंग के दौरान तीन दरोगा और एक कॉन्स्टेबल ने ट्रक को रोक लिया। चालक से कागज मांगे। कागज दिखाने पर वह उन्हें फर्जी बताने लगे। इसके बाद वह ट्रक लेकर चल दिए। चालक ने मालिक को फोन कर जानकारी दी। ऋषभ मौके पर पहुंच गए। ट्रक छोड़ने के नाम पर पुलिसकर्मियों ने ऋषभ से 40 हजार की रिश्वत मांगी। कहा कि पैसे दे दो नहीं तो ट्रक नहीं छोड़ेंगे। ऋषभ ने एक परिचित को फोन किया। पुलिस कर्मियों को ऋषभ ने 20 हजार रुपये दिए। इसके बाद उन्होंने ट्रक छोड़ दिया। सिकंदरा थाने के दो दरोगा और एक कांस्टेबल पर गाज गिरने की संभावनाएं हैं। ताजगंज थाने का एक दरोगा भी वहां मौजूद था। वह क्या कर रहा था। इस बात की भी जांच की जा रही है। पूर्व में सिकंदरा थाने का ही एक दरोगा रिश्वत लेने के मामले में निलंबित हो चुका है। सिकंदरा थाने का भ्रष्टाचार देखकर कई अधिकारी भी परेशान हैं। इधर कुछ दिनों पूर्व सदर में भी फायरिंग के आरोपी पैसे लेकर छोड़ दिए गए थे।











