आगरा। कुलाधिपति के ओएसडी विश्वविद्यालय में दौरे पर आए हुए हैं। आज उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ बैठक करने के बाद विश्वविद्यालय और आवासीय संस्थानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें टॉयलेट काफी गंदे मिले। यह देखकर वह काफी नाराज हुए।
ओएसडी डॉ. पंकज जानी ने सुबह अधिकारियों के साथ में बैठक की। बैठक में उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों के रिक्त पदों के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने पूछा विश्वविद्यालय की साल की कितनी इनकम है और कितना खर्चा है। इस पर उन्हें जवाब दिया गया कि विश्वविद्यालय की साल में डेढ़ सौ करोड़ की इनकम है और 90 करोड़ का खर्चा। ओएसडी ने कहा कि 4 जिले कम हो गए हैं। इसलिए इनकम भी कम हो जाएगी। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों के साथ बैठक की। सर्वप्रथम नैक के संबंध में चर्चा करते हुए कहा की नैक ना ही हमारी परीक्षा लेता है और ना ही हमारा मूल्यांकन करता है, अपितु यह हमें दिशा प्रदान करता है। हमें नैक के लिए अपने उत्कृष्ट कार्यों का एक शोकेस तैयार करना होगा। समूची शिक्षा प्रणाली की धुरी पर शिक्षक होता है और किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शिक्षकों से होती है। विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए हम कैसे आकर्षित कर सकते हैं ? हमें इसका प्रयास करना होगा। इसके लिए हमें नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना होगा, अपनी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाना होगा और ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल को विकसित करना होगा, तभी हम विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए आकर्षित कर पाएंगे। इसके बाद वह ललित कला संस्थान में निरीक्षण पर पहुंचे। शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर शरद उपाध्याय और महामंत्री प्रोफेसर वीपी सिंह ने भविष्य निधि खाते पर मिलने वाली ब्याज दर को कम बताया और इस बात की शिकायत की।
निरीक्षण करने के बाद वह जुबली हॉल में कर्मचारियों की बैठक लेने पहुंचे। बैठक में केवल 50 से 60 कर्मचारी मौजूद थे। बाकी सब घर चले गए। बैठक में कर्मचारी नेता डॉ. आनंद टाइटलर ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कमीशन के चक्कर में सिक्योरिटी एजेंसी पर हर महीने मोटी धनराशि खर्च की जा रही है। इसको बंद कराया जाए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित के कार्यकाल में 145 करोड़ रुपये के फिजूल में निर्माण कार्य करा दिए गए थे, जबकि उनकी कोई आवश्यकता नहीं थी। पूर्व कुलपति के कार्यकाल की सीबीआई जांच की मांग भी उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से उठाई। डॉ. टाइटलर ने यह भी कहा कि कई कोर्स ऐसे हैं जिनमें 2 से 4 छात्र छात्राएं हैं और वहां पर लाखों रुपए वेतन में खर्च हो रहा है। इसलिए उनको बंद कर दिया जाए। कर्मचारी नेता अरविंद गुप्ता ने कहा कि कई निजी विश्वविद्यालय खुल रहे हैं। इससे यहां छात्र कम हो रहे हैं, जबकि खर्चे वहीं के वहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने संविदा कर्मचारियों को समायोजन करने की मांग भी उठाई। महिला कर्मचारी नीलम शर्मा और हरि कुमारी ने कहा कि विश्वविद्यालय में महिला कर्मचारियों के लिए टॉयलेट नहीं हैं। कर्मचारी अनिल ने आवास और बिल्डिंग जर्जर होने की समस्या बताई। इसके साथ ही एक कर्मचारी ने कहा कि विश्वविद्यालय कमीशन के लालच में बाहर से पानी के कैंपर खरीदता हैं जबकि विश्वविद्यालय को आरो लगवा लेना चाहिए। बैठक के बाद जब ओएसडी निकल रहे थे तो उन्हें छात्र नेता बृजेश शर्मा, निर्वेश शर्मा, मानवेंद्र सिंह आदि ने घेर लिया। वह उन्हें विश्वविद्यालय के टॉयलेट में ले गए। टॉयलेट की स्थिति बद से बदतर थी। टॉयलेट की स्थिति को देखकर ओएसडी प्रोफेसर संजय चौधरी पर नाराज हुए। छात्र नेताओं ने ओएसडी से यह भी कहा कि यहां पर अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य भी प्रोफेसर करते हैं। प्रोफेसरों से सिर्फ पढ़ाई का कार्य ही कराया जाए।













