-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। आगरा पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। यहां बड़े-बड़े खेलों को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस अपराधियों को पकड़ने की जगह जमीनों के मामले निपटा रही है। दो मुकदमों में 6 लोगों को जेल भेज कर करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा कराने का एक और ताजा मामला सामने निकलकर आया है। डीजीपी कार्यालय में शिकायत होने के बाद जब एसपी यहां जांच करने आए तो तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार सहित चार पुलिस कर्मी निलंबित किए गए हैं।
जगदीशपुरा इलाके में बैनारा फैक्ट्री के निकट करीब दस हजार गज जमीन है। वर्ष 1974 में जमीन पर दो लोगों ने पार्टनशिप में मील लगाई थी। कुछ साल बाद ही बंद हो गई। जमीन को लेकर जयपुर हाउस निवासी नेम चंद जैन का दूसरे पक्ष से विवाद चल रहा है। एक पक्ष ने जमीन पर कई दशक पहले केयरटेकर के रूप में रवि कुशवाह उसके भाई संकरिया कुशवाह पुत्र दीनानाथ को रख रखा था। रवि की पत्नी पूनम और ननद पुष्पा भी वहां रहती थीं। बेश्कीमती जमीन पर नेमचंद जैन को कब्जा लेना था। वह अकेले यह काम करने में सक्षम नहीं थे। कई नामी लोग उनके साथ मिल गए। उसके बाद खेल शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि एक चर्चित ने इस खेल में अहम भूमिका निभाई। जमीन पर जो लोग रह रहे थे उन्हें वहां से हटाया जाना था ताकि जमीन पर कब्जा लिया जाए।
आरोप है कि इस खेल में जगदीशपुरा पुलिस मोहरा बनी। पहला मुकदमा 26 अगस्त 2023 को एनडीपीएस एक्ट का लिखा गया। पुलिस ने मौके से रवि कुशवाह, संकरिया और जटपुरा निवासी ओमप्रकाश को पकड़ा। मौके से एक वाहन बरामद दिखा। उसकी नंबर प्लेट फर्जी बताई गई। तीन पैकेट से नौ किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया। तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया। मुकदमे में अरुण को फरार दिखाया गया। जो आज तक नहीं पकड़ा गया।
नौ अक्तूबर को उसी जगह आबकारी निरीक्षक ने छापा मारा। मौके पर रह रहीं पूनम और उसकी नदद पुष्पा व फुरकान को पकड़ा। जगदीशपुरा थाने में आबकारी अधिनियम का मुकदमा लिखा गया। धोखाधड़ी की धाराएं भी लगाई गईं। तीनों को जेल भेजा गया। जगह खाली हो गई। उसके बाद वहां रातों रात काम चला। जगह-जगह से टूटी पड़ी बाउंड्री वाल बनवाई गई। उस पर पुताई कराई गई। सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात कर दिए गए। जमीन पर कब्जा दिलाने में मदद करने वाले नामी लोग अब वहां प्लाट काट रहे हैं। डीसीपी सिटी सूरज राय की रिपोर्ट पर पुलिस आयुक्त ने तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा वर्तमान एसओ एमएम गेट जितेंद्र कुमार, मुख्य आरक्षी उपेंद्र मिश्रा, शिवराज सिंह व आरक्षी रविकांत को निलंबित किया है। एनडीपीएस का मुकदमा एसओ विकास कुमार ने लिखाया था। उसका स्थानांतरण सहारनपुर हो चुका है। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए वहां रिपोर्ट भेजी जा रही है।
डीजीपी ऑफिस में शिकायत के बाद अधिकारी नींद से जागे
खेल कमिश्नरेट में हुआ था। यहां शिकायत होती तो दाखिल दफ्तर कर दी जाती। यह मानते हुए शिकायत सीधे डीजीपी ऑफिस में की गई। डीजीपी ऑफिस से एक एसपी रैंक के अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच अधिकारी पिछले दिनों आगरा आए। मौके पर गए। फोटो खींचने के बाद कुछ लोगों के बोदला चौकी पर बयान लिए। उसके बाद वापस लौट गए। मामला डीजीपी ऑफिस तक पहुंचने के बाद अधिकारियों के पसीने छूट गए।
चर्चित ने ठेका लिया था, उसने ही रास्ता दिखाया, चर्चाएं
लोग यह बोल रहे हैं कि काम आसान नहीं था। सालों से जमे परिवार को जमीन से हटाना था। पुलिस की मदद के बिना संभव नहीं था। कोर्ट का कोई स्पष्ट आदेश नहीं था। चर्चित ने ठेका लिया था। उसने ही रास्ता दिखाया। चर्चाएं तो बड़े खेल की हैं मगर इसके किसी के पास पुख्ता प्रमाण नहीं है।
शाहगंज पुलिस ने अवैध हिरासत में रखकर कराया था बेनामा, आज तक कार्रवाई नहीं
आगरा। शाहगंज थाना पुलिस ने भी कुछ लोगों को अवैध हिरासत में रखकर सदर तहसील में ले जाकर बैनामा कराया था। आज तक पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। जांच के नाम पर मामले को ठंडा बस्ते में डाल दिया गया है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी के समय एक दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ था। एक साल से ऊपर बीत गया है और जांच पेंडिंग में चल रही है।











