-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। एक थानाध्यक्ष के व्यवहार से महिला दरोगा काफी परेशान है। थानाध्यक्ष के द्वारा महिला दरोगा के साथ लगातार अभद्रता की जा रही है। वह उसे दबाव में लेने के लिए हर समय परेशान कर रहा है। थानाध्यक्ष का व्यवहार देखकर महिला दरोगा की रो-रोकर तबीयत बिगड़ गई है। रविवार सुबह मामला जब अधिकारियों तक पहुंचा तो अधिकारियों ने जांच शुरू कराई है। महिला दरोगा के बयान लेने के बाद घर पर उन्हें आराम के लिए भेज दिया गया है।
एक थाने में कुछ दिनों पहले ही प्रभारी के रूप में एक दरोगा की तैनाती हुई है। दरोगा ने चार्ज लेने के बाद से ही थाने में आतंक मचा दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दरोगा विशेष मंसूबे के तहत थाने में आया है। पूर्व में दरोगा एक बार निलंबित भी हो चुका है। फिर भी उसकी आदत में कोई सुधार नहीं है।
इधर दरोगा के द्वारा चार्ज लेने के बाद एक महिला दरोगा को कुछ इशारा किया गया। महिला दरोगा को उसका इशारा समझ में आ गया कि उसके मंसूबे सही नहीं है। महिला दरोगा ने उससे कहा कि मुझे उन दरोगाओं में मत समझना, मैं अच्छे घर की लड़की हूं। इज्जत और सम्मान से समझौता नहीं करूंगी। सरकार महिलाओं को लेकर कितना सशक्त है और आप महिलाओं के प्रति कितनी गंदी सोच रखते हैं। महिला दरोगा के यह कहने के बाद से ही प्रभारी महिला दरोगा के पीछे पड़ गया है। वह जब भी उसके सामने आती है उससे अभद्रता से बात करता है। वह उसे बोल रहा है कि वह उसे नौकरी नहीं करने देगा, उसकी कमिश्नरेट के अधिकारियों में बहुत पहुंच है। पहुंच का उदाहरण यह है कि उसे इतना बड़ा थाना भी मिल गया है। हर पांच मिनट में वह महिला दरोगा से इस कदर अभद्रता से बात कर रहा है कि महिला दरोगा का दो दिन से रो रो कर बुरा हाल है। महिला दरोगा के रोने और परेशान होने की बात जब अधिकारियों को पता चली तो उन्होंने उसे अपने पास बुलाया। महिला दरोगा ने अपने बयान दे दिए हैं। महिला दरोगा ने कहा है कि उसे थाने से दूसरे थाने में भेज दिया जाए। वह इस हालत में नौकरी नहीं कर पाएगी। महिला दरोगा ने यह भी कहा है कि एक गंभीर मुकदमे में बिना जांच किए थानाध्यक्ष चार्जशीट लगाने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। इधर थानाध्यक्ष की कार्यशैली से कई और पुलिसकर्मी भी परेशान हैं। वे थाने से ट्रांसफर कराने की जुगत में लग गए हैं।











