आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अंकतालिकाओं के फर्जीवाड़े में जेल गया व्यक्ति विश्वविद्यालय में डेली बेसिस पर काम कर रहा था। यही नहीं उससे कॉपी लाने और ले जाने का भी गोपनीय काम कराया जा रहा था। जेल गए व्यक्ति को नौकरी देने और गोपनीय काम कराए जाने पर विश्वविद्यालय के वर्तमान अधिकारी भी शक के घेरे में आ गए हैं। पुलिस इन्हें भी नोटिस देकर उनसे सवाल-जवाब कर सकती है। देवेंद्र की पोल खुलने के बाद वर्तमान अधिकारियों के भी पसीने छूटे हुए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस टेंपो चालक देवेंद्र पर कॉपी बदलने का आरोप है, वह वर्ष 2018 में मथुरा के छाता थाने से जेल गया था। देवेंद्र ने कई लोगों को फर्जी मार्कशीट बांट दी थी। शिकायत पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था और वह जेल गया था। लंबे समय तक वह जेल में रहा। फिर उसकी जमानत हुई। जमानत पर बाहर आने के बाद वह विश्वविद्यालय में दलाली करने लगा। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक राजीव कुमार के चहेते बाबुओं ने भी उसको विश्वविद्यालय में डेली बेसिस पर लगाए जाने के लिए उनसे सिफारिश की। परीक्षा नियंत्रक राजीव कुमार ने देवेंद्र को डेली बेसिस पर लगा दिया। इधर वर्तमान परीक्षा नियंत्रक ओमप्रकाश के द्वारा भी उससे परीक्षा संबंधी गोपनीय काम कराया जाना जारी रहा।
देवेंद्र ने पूछताछ में कुछ और लोगों के पुलिस को नाम बताए हैं। पुलिस सभी से पूछताछ में जुटी हुई है। कुछ शिक्षकों और बाबूओं से भी पुलिस मामले में पूछताछ कर सकती है। पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि देवेंद्र के पास प्रॉपर्टी भी अच्छी खासी है। पुलिस को गोपनीय विभाग के कुछ बाबुओं पर भी शक है कि वह देवेंद्र के साथ मिले हुए हैं। इसके साथ ही एजेंसी के कर्मचारियों से भी पुलिस अभी लंबी पूछताछ कर सकती है। पुलिस ने एजेंसी के कर्मचारी दीपक को पूछताछ के लिए बुलाया था। दीपक पुलिस को सही तरीके से जवाब नहीं दे सका है। एएसपी हरीपर्वत सत्यनारायण ने बताया कि आज पुलिस ने देवेंद्र को जेल भेज दिया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।











