आगरा। एक ओर भारत के प्रधानमंत्री द्वारा ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना चलाई जा रही है वहीं दूसरी ओर चंबल के पानी को अन्यत्र ले जाने की कोशिश की जा रही है। यह बातें पूर्व मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने कहीं।
प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने भदावर हाउस से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 1979 में मेरे पिताजी राजा महेंद्र रिपुदमन सिंह प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार में मंत्री थे। उन्होंने ‘राजा महेंद्र रिपुदमन सिंह चंबल डाल परियोजना’ उत्तर प्रदेश सरकार में स्वीकृत कराई थी। फिर विपक्ष की सरकार आई, कोई काम नहीं हुआ था। जब 1996 में मैं चुनाव जीता और 1997 में मंत्री बना तब मैंने इसकी जबरदस्त पैरोकारी की। तब बतौर मंत्री मैंने पुनः डीपीआर बनवाकर उस योजना को पुनः स्वीकृत कराया। सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश ने व्यक्तिगत रुचि लेकर इसे पूर्ण करवाया। उन्होंने सर्किट हाउस में बैठकर स्वयं कई बार मीटिंग ली और समस्त अधिकारियों को निर्देशित कर दिया कि राजा अरिदमन सिंह जो कहें, उसे मेरा आदेश मानकर पूरा करें। उन दिनों लापरवाही करने पर एक चीफ इंजीनियर को सस्पेंड भी कर दिया गया था। सिंचाई मंत्री के प्रयास से 18 महीने में ही राजा महेन्द्र रिपुदमन सिंह चंबल डाल परियोजना शुरू हो गई। फिर इसकी तर्ज पर मुरैना और धौलपुर में भी लिफ्ट इरीगेशन शुरू की गई। इन सबके कारण चंबल का पानी धीरे-धीरे अपस्ट्रीम में तो बढ़ गया लेकिन डाउनस्ट्रीम शनै: शनै: पानी घट रहा है। पानी घटने के कारण नेशनल चंबल सेंचुरी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
उन्होंने कहा है कि चंबल के पानी में वाटर शेयरिंग के हिसाब से उत्तर प्रदेश का 10% हिस्सा है। उसमें से लिफ्ट इरीगेशन (चार पंपों के इस्तेमाल) से सात फीसदी यानी 450 क्यूसेक पानी बाह में सिंचाई व पेयजल आदि के लिए प्रयोग किया जाता है। इसी कारण वहां का भूगर्भ जल अन्य ब्लॉकों से बेहतर है। अगर हमारे बाह के लिए प्रयुक्त होने वाला यह चंबल का पानी अन्यत्र लिया जाता है तो हमारी राजा महेन्द्र रिपुदमन सिंह चंबल डाल परियोजना बंदी के कगार पर आ जाएगी। किसान परेशान होंगे। जनता प्यासी रह जाएगी। तब मजबूरन हमें इसका विरोध करना पड़ेगा।
सेंट्रल वॉटर कमीशन में भी यह मुद्दा पहुंचेगा तो वहां भी नदियों के जल की उचित साझेदारी के मुद्दे पर आपत्ति होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेशक चंबल का पानी अन्यत्र जाए पर चंबल सेंचुरी पर संकट न आए। हमको बाह के हिस्से का 450 क्यूसेक पानी बरकरार चाहिए।











