नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति की अपनी एक अलग शैली है। अक्सर उनके पॉलिटिकल मूव चौंकाने वाले होते हैं। ये अचानक चौंकाने वाला भाव उनकी पॉलिटिक्स की यूएसपी है। उनके हमले भी चौंकाने वाले होते हैं। विपक्ष को संभलने का मौका नहीं मिलता। आर्टिकल 370 को बेअसर करते वक्त भी उन्होंने ऐसा किया। बुधवार को कोरोना पर हुई मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग में भी उन्होंने कुछ-कुछ ऐसा किया। बैठक देश में कोरोना के हालात पर चर्चा के लिए थी, लिहाजा किसी ने नहीं सोचा होगा कि पीएम बड़ी चतुराई से पेट्रोल-डीजल पर राज्यों की तरफ से वसूले जा रहे टैक्स का मसला उठा देंगे। विपक्ष शासित राज्यों का बाकायदा नाम लेकर आम जनता को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत नहीं देने के लिए कठघरे में खड़ा कर देंगे। पीएम मोदी का ये अटैक अचानक और अप्रत्याशित था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नवंबर में दिवाली से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल पर क्रमश: 5 और 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम कर दिया। इससे राज्यों पर भी टैक्स कम करने का दबाव पड़ा। एक-एक करके बीजेपीशासित राज्यों ने भी अपने-अपने यहां पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटा दिया जिससे विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों पर टैक्स कम करने का दबाव और ज्यादा बढ़ गया। नवंबर को बीते एक अरसा हो गया था लेकिन पीएम मोदी ने कोरोना पर होने वाली बैठक में अचानक विपक्षशासित राज्यों से पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने की अपील करके उन्हें हक्का-बक्का कर दिया।
पीएम मोदी का विरोधियों पर अटैक भले ही अचानक और अप्रत्याशित होता है लेकिन इसका मतलब बिना सोचे-विचारे कतई नहीं है। प्रधानमंत्री बहुत सोच-विचार के बाद नाप-तौल कर अटैक करते हैं, बस टाइमिंग का एलिमेंट चौंकाने वाला होता है। पीएम मोदी के अटैक के बाद बीजेपी का प्रचार तंत्र तुरंत सक्रिय हो जाता है। आईटी सेल युद्ध स्तर पर काम में लग जाता है। अचानक हुए अप्रत्याशित हमले से विपक्ष जबतक संभले, तबतक बीजेपी का प्रचार तंत्र लोगों तक पीएम की बात और उनके संदेश को पहुंचाने में बहुत हद तक कामयाब हो चुका होता है। पेट्रोल-डीजल पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गैरबीजेपी शासित राज्यों में ज्यादा टैक्स का मसला उठाया तो विपक्ष को काउंटर के लिए कुछ सूझा ही नहीं। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को तो प्रतिक्रिया देने में पूरे 24 घंटे का वक्त लग गया। राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि ईंधन की कीमतों पर कुल टैक्स का 68 फीसदी हिस्सा केंद्र के पास जाता है लेकिन पीएम मोदी हर कमी का ठीकरा राज्यों पर फोड़ते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मंत्री केसीआर जैसे कुछ नेताओं ने जरूर पलटवार किया लेकिन ये केंद्र से सेस घटाने की मांग या फिर राज्यों को जीएसटी का हिस्सा समय से न मिलने जैसी शिकायतों तक सीमित रहे। पीएम मोदी ने जिन राज्यों का नाम लेकर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने की मांग की, उनमें से किसी भी राज्य से ये बताते नहीं बन पा रहा कि जब बीजेपीशासित राज्य टैक्स घटा सकते हैं तो वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे। अब गैरबीजेपी शासित राज्यों पर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने का दबाव और ज्यादा बढ़ गया है। महाराष्ट्र तो इस पर विचार भी करने लगा है।











