आगरा। भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा नीट और अन्य पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर धरना दे रहे छात्र-छात्राओं को कथित तौर पर ‘गटर जेनरेशन’ कहने और उनके माता-पिता के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में करीब एक घंटे तक लंबी बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मामले में आदेश सुनाने के लिए 3 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
मामले की सुनवाई स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में हुई। वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि 20 जुलाई 2026 को नीट और अन्य पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ पुलिस ने बल प्रयोग किया। वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने बहस के दौरान कंगना रनौत के सोशल मीडिया पर दिए गए कथित बयान का उल्लेख किया। वादी पक्ष के अनुसार, कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर आंदोलन स्थल की कथित स्थिति को लेकर कहा था कि उन्होंने जिंदगी में इतनी बड़ी गंदगी कभी नहीं देखी और वहां के वीडियो देखकर उन्हें उबकाई आती है। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों की परवरिश को लेकर सवाल उठाते हुए उन्हें कथित तौर पर ‘गटर जेनरेशन’ कहा। रमाशंकर शर्मा ने अपनी दलीलों के समर्थन में सोशल मीडिया से संबंधित साक्ष्य और समाचार पत्रों में प्रकाशित सामग्री भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान और राजवीर सिंह ने भी वादी पक्ष की ओर से कोर्ट में बहस की। उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना रनौत ने सोशल मीडिया का कथित रूप से दुरुपयोग किया और जानबूझकर आईटी एक्ट के तहत अपराध किया।वरिष्ठ अधिवक्ता राजवीर सिंह ने अपनी दलीलों के दौरान बीबीसी लंदन की रिकॉर्डिंग भी अदालत में पेश की। वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुमंत चतुर्वेदी और प्रीति गुप्ता समेत कई अन्य अधिवक्ताओं ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा। करीब एक घंटे तक चली बहस में वादी पक्ष की ओर से सोशल मीडिया पर कथित टिप्पणियों, समाचार रिपोर्टों और अन्य प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर अपनी दलीलें रखी गईं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में आदेश सुनाने के लिए 3 सितंबर 2026 की तारीख तय कर दी।











