आगरा। जज केसों की अच्छे तरीके से स्टडी करके उन्हें जल्द से जल्द निपटाएं। पुराने केसों पर विशेष ध्यान दें। यह कहना था इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल का।
जस्टिस बिंदल आज आगरा में खंदारी स्थित जेपी सभागार में ‘sensitization of district court judges on gender justice and differently abled victim’s/ survivors of sexual abuse’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का शुभारंभ चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति राजेश उपाध्याय, न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दीप प्रज्वलन कर किया।
चीफ जस्टिस ने न्यायाधीशों को पेंडिंग केसों की संख्या बताई। चीफ जस्टिस ने कहा कि पेंडिंग केसों को जल्द से जल्द निपटाया जाए। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों को लैंगिक अपराधों से पीड़ित दिव्यांग व्यक्तियों को लैंगिक न्याय के संबंध में संवेदनशील किए जाने की आवश्यकता है। यह उद्देश्य तभी पूरा होगा जब यह उनके दृष्टिकोण और काम करने में परिलक्षित हो। चीफ जस्टिस ने कई केसों का हवाला भी दिया।

न्यायमूर्ति सरोज यादव ने कहा कि जब हम जज की कुर्सी पर बैठते हैं, उस समय हम क्या हैं हमें भूल जाना चाहिए। हमें निष्पक्ष होकर न्याय करना चाहिए। न्यायमूर्ति और आगरा के प्रशासनिक जज सुनीत कुमार ने लैंगिक अपराधों के मामलों के दृष्टिकोण पर विचार व्यक्त किये।

संगोष्ठी में डीईआई की डॉ. सोना दीक्षित ने कहा कि जजों को अपने कार्य में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। पूर्ण चेतना के साथ जजमेंट देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जजों को न्याय का गहनता से अध्ययन करना चाहिए। कुछ जजों की टिप्पणियों पर उन्होंने प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्हें संतुलित भाषा में टिप्पणी देनी चाहिए।

संगोष्ठी में न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय, न्यायमूर्ति विवेक चौधरी, न्यायमूर्ति अजय भनोट, न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह, न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान, न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार, रजिस्ट्रार जनरल आशीष गर्ग, आगरा के जिला जज विवेक संगल, नोडल अधिकारी अपर जिला जज मोहम्मद राशिद, अरुण दीक्षित सहित कई जिलों के जिला जज और अन्य जज उपस्थित रहे।












