आगरा। खेरागढ़ क्षेत्र की ऊटंगन नदी में डूबे 13 युवकों में से सात युवकों का आज चौथे दिन भी सुराग नहीं लग सका है। हालांकि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के प्रयास लगातार जारी हैं। मौके पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ भी जुटी हुई है। वहीं उन लोगों के परिवार भी मौजूद हैं जो युवक गायब हैं। इन परिवार के लोगों की रोते-रोते आंखें सूज गई हैं। बस उन्हें उसे पल का इंतजार है कि उनका सुराग लग जाए। जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर, भाजपा जिलाध्यक्ष भी मौके पर मौजूद हैं।
कुशियापुर गांव के लोग गुरुवार दोपहर देवी मूर्तियों को विसर्जन के लिए डूंगरवाला गांव के पास लेकर आए थे। विसर्जन के दौरान 13 लोग उटंगन नदी में डूब गए थे। हादसे में पांच युवकों की मृत्यु हो गई थी। वहीं एक युवक का उपचार चल रहा है। सात की तलाश जारी है। रविवार को भी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग मिलकर सर्च ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। बांध को पूरा करने के लिए मेरठ से विशेषज्ञों और मजदूरों की एक टीम घटनास्थल पर लगी हुई है। खोज अभियान में सहायता के लिए स्थानीय युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 40 मीटर लंबा अस्थायी मिट्टी का बांध तैयार किया है। इससे नदी के लगभग 250 मीटर क्षेत्र में पानी का बहाव रोका गया है, ताकि डूबे युवकों की तलाश आसान हो सके। जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से नदी की धारा को मोड़कर बीच में नाला बनाकर दूसरी ओर किया गया है ताकि जलस्तर घटाया जा सके। घटनास्थल पर हजारों की संख्या में लोग जमा हैं और परिजन नदी की ओर टकटकी लगाए अपने अपनों के लौटने की उम्मीद में डटे हुए हैं। भरतपुर जिले में ऊटंगन नदी का बहाव रोकने के आदेश दिए गए हैं। आगरा जिले की सीमा में घुसियाना गांव पर जेसीबी मशीनों के जरिए मिट्टी से भरे कट्टों से पानी रोका जा रहा है। फजीहतपुर और निमैना चेकडेम के पट भी बंद कर दिए गए हैं ताकि सर्च ऑपरेशन के दौरान जलस्तर नियंत्रित रखा जा सके।











