आगरा। शाहगंज थाना पुलिस के द्वारा दिल्ली के टप्पेबाज गैंग को छोड़ने पर मामला सुर्खियों में आने के बाद अंडर ट्रेनिंग दरोगा सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अंडर ट्रेनिंग दरोगा और सिपाही गैंग को अपने स्तर से थाने से छोड़ सकते हैं।
डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय को शिकायत मिली कि जनकपुरी महोत्सव के दौरान दिल्ली के चार टप्पेबाज पुलिस ने पकड़े थे। सीओडी चौराहे के पास एक मोबाइल की दुकान है। मोबाइल व्यापारी को चार युवक सोना बेचकर गए थे। व्यापारी ने सोने की जांच कराई तो वह कम टंच का निकला। व्यापारी ने यह बात अपने परिचित पुलिस वाले को बताई। उसने शाहगंज पुलिस से संपर्क करा दिया। व्यापारी ने सोना बेचने वालों से फिर संपर्क किया। उनसे सोना लेकर आने को कहा। वे सोना लेकर आ गए। पुलिस ने उन चारों दबोच लिया। शिकायत हुई थी कि पुलिस उन्हें डिवीजन चौकी पर ले गई। उनसे पूछताछ हुई। उन्होंने बताया कि सुल्तानपुरी, दिल्ली के निवासी हैं। अपने नाम गौरव, संदीप, संकल्प आदि बताए। पुलिस को बताया कि सोने के आभूषण कोतवाली क्षेत्र में सुमित से गलवाते हैं। पुलिस ने सुमित को भी उठा लिया। इतना ही नहीं उस व्यापारी को भी चौकी पर बैठा लिया जिसने सोना खरीदा था। सभी को जेल भेजने की धमकी दी गई। सभी घबरा गए। पुलिस ने जैसा बोला वैसा किया। पुलिस के मन की होते ही सभी को निर्दोष होने का प्रमाणपत्र देकर छोड़ दिया गया। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि जांच में एक अंडर ट्रेनी दरोगा और दो सिपाहियों की भूमिका संदिग्ध मिली हैं। एसआई शुभम सिंह, सिपाही प्रशांत, सिपाही संजीव अत्री को निलंबित किया गया है। खास बात यह है कि इस मामले में इंस्पेक्टर शाहगंज और डिवीजन चौकी इंचार्ज बच गए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उस दिन सीता का डोला निकल रहा था। वे आयोजन में व्यस्त थे। सवाल यह उठ रहा है कि डोला पूरी रात नहीं निकला था। आरोपित रातभर रखे गए। इंस्पेक्टर को पहले इस बात की जानकारी हो गई थी तो उन्होंने लिखित रिपोर्ट अधिकारियों को क्यों नहीं दी। चौकी प्रभारी ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं बताया।











