-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। आखिर आगरा पुलिस में यह हो क्या रहा है। पिछले एक साल में अभी तक देखने को मिला है पीड़ितों के खिलाफ उल्टा मुकदमा दर्ज हो रहा है। थाना पुलिस ने अपने यहां लोगों को बंधक बनाकर जबरन बैनामा कराया है। थाना पुलिस के सुनवाई नहीं करने पर कोर्ट के आदेश पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो रहा है और फिर खुलासा भी हो रहा है। अब एक नया ताजा मामला सामने आया है। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में सजा काट रहे कुख्यात सुधीर सिंह भदौरिया पर आगरा कमिश्नरेट पुलिस मेहरबान दिखाई दे रही है। बेहोश करके अश्लील फोटो खींचकर ब्लैकमेल करने और जेल से फोन करके रंगदारी मांगने के आरोप में शाहगंज थाने में दर्ज हुए मुकदमे में विवेचना हुई। चार्जशीट कोर्ट गई। कोर्ट ने आरोपियों के वारंट जारी कर दिए। हाईकोर्ट से भी आरोपियों को राहत नहीं मिली। इस मामले में आरोपित पक्ष के प्रार्थना पत्र पर अग्रिम विवेचना कराई जा रही है। आखर यह कैसे हो रहा है!
बता दें कि 2022 में महिला डॉक्टर की तहरीर पर सुधीर के अलावा उसके बड़े भाई महेश कुमार सिंह, वंदना उर्फ गौरी सिंह, ममता सिंह, सुमन, रेनू सिंह और सुमन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। 23 नवंबर 2022 को छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई थी। विवेचना में एक नाम निकाला गया था। महेश कुमार सिंह मुख्य आरोपित था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा था। मुकदमे में अश्लील फोटो वायरल का भी आरोप लगाया था। पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा बढ़ाई थी।
पीड़ित महिला डॉक्टर ने इस मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है। उनका आरोप है कि कुख्यात सुधीर सिंह भदौरिया के रसूख के चलते मामले में अग्रिम विवेचना कराई जा रही है। विवेचक द्वारा उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उनके मुकदमे में चार्जशीट तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने लगवाई थी। उसकी कानूनी लड़ाई एक कुख्यात और उसके परिवारीजनों से है। पूर्व में उसे सुरक्षा दी गई थी। जो हटा ली गई। उनकी जान को खतरा है। वह पुलिस की पहली जांच से संतुष्ट थीं। अग्रिम जांच के लिए कोई प्रार्थना पत्र भी नहीं दिया था। आरोपियों को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी। इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचाना चाहती है।
उठ रहे हैं कई सवाल
-पहली विवेचना इंस्पेक्टर जसवीर सिंह सिरोही ने की थी। वर्तमान में वह इंस्पेक्टर कागारौल हैं। विवेचना में गड़बड़ी थी तो उनके खिलाफ अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कोई जांच शुरू क्यों नहीं हुई।
-प्रतिवादी पक्ष के प्रार्थना पत्र पर कितने मामलों में चार्जशीट कोर्ट पहुंचने के बाद अग्रिम जांच के आदेश हुए।
-पहली चार्जशीट में कमी तो तत्कालीन सीओ ने क्या देख पर्चे अग्रसरित किए। उनके खिलाफ कोई जांच क्यों नहीं शुरू हुई।











