आगरा। ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र में तैनात हेड कांस्टेबल का पर्स चोरी करने वाला चोर नहीं हरियाणा पुलिस का बर्खास्त सिपाही निकला। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
कुशल पाल चौधरी हेड कांस्टेबल के पद पर ट्रांस यमुना थाने में तैनात हैं। 6 सितंबर की रात को वह ड्यूटी खत्म करके थाने में पहली मंजिल पर बने बैरक में आराम करने चले गए थे। अपनी वर्दी उतार कर उन्होंने खूंटी पर टांग दी थी। सात सितंबर की दोपहर में उनकी नींद खुली तो पेंट की जेब से पर्स गायब था। उसमें पर्स में पैन कार्ड, एटीएम और क्रेडिट कार्ड के साथ आधार कार्ड भी था। पर्स में ही उन्होंने एटीएम का पिन लिखकर रख रखा था। उन्होंने देखा कि उनके एटीएम से किसी ने 45000 रुपए निकाले। पुलिस कमिश्नर से शिकायत के बाद उनका मुकदमा लिखा जा सका था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस चोर की तलाश में थी। जांच के दौरान पता चला हरियाणा का बर्खास्त सिपाही पर्स चोरी करके ले गया था। पकड़े गये बर्खास्त कांस्टेबल वजीर सिंह का आगरा के मुख्य आरक्षी से कोई संबंध नहीं था। वह यह कहकर आता था कि हरियाणा पुलिस का सिपाही हूं और आगरा में दबिश देने आया हूं। आगरा के मुख्य आरक्षी ने इस पर भरोसा कर लिया और अपने घर तक ले गया। जिस दिन वजीर सिंह मुख्य आरक्षी के घर पहुंचा, वहां उसकी पैंट लटकी मिल गई। इस दौरान मौका पाकर पर्स से एटीएम कार्ड और पिन नंबर लिखा कागज निकाल लिया और एटीएम से 45000 रुपये निकालकर फरार हो गया। ट्रांस यमुना पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी ऐसे ही मथुरा और अलीगढ़ में भी जाता रहा है। वारदात के बाद आरोपी ने एटीएम से 45 हजार रुपये निकाले, इसके बाद भगवान टॉकीज पेट्रोल पंप पर 20 हजार रुपये कार्ड से स्वाइप किए और क्रेडिट कार्ड से भी कैश ट्रांजैक्शन किया। आरोपी ने 45 हजार रुपये अपने घर भिजवा दिए, जबकि बाकी रकम से शॉपिंग और मौज-मस्ती की। मुख्य आरक्षी ने सात दिन बाद इसकी एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी वजीर सिंह, निवासी कोसली, रेवाड़ी (हरियाणा), 2001 से 2006 तक टेरिटोरियल आर्मी में था। इसके बाद 2007 में वह हरियाणा पुलिस में सिपाही बन गया। लेकिन वर्ष 2018 में हेड कांस्टेबल भर्ती में लेनदेन घोटाले में दोषी पाए जाने पर उसे बर्खास्त कर दिया गया। इसके बावजूद वह खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों को भ्रमित करता रहा और अब चोरी के अपराध में पकड़ा गया।











