आगरा। आगरा नगर निगम में मेयर और नगरायुक्त के बीच में विवाद गहराता जा रहा है। इसका असर सोमवार को मेयर द्वारा बुलाए गए सदन में देखने को मिला। सोमवार को सदन में नगर आयुक्त के मौजूद नहीं होने पर पार्षदों ने हंगामा करते हुए निंदा प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव पर 72 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष ने हमला करते हुए कहा कि यह ट्रिपल इंजन सरकार की विफलता का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री से शनिवार को महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने मुलाकात की थी। उन्हें सौंपे शिकायती पत्र में महापौर ने आरोप लगाया था कि नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 117 (6)बी का दुरुपयोग किया है। यह धारा केवल आपातकालीन स्थितियों के लिए है, लेकिन इसे सामान्य प्रक्रिया बनाकर 40 से 50 करोड़ रुपये के कार्य ई-टेंडरिंग के बजाय ऑफलाइन बॉक्स प्रणाली से आवंटित कर दिए गए। दावा किया कि ऑफलाइन प्रक्रिया के कारण केवल 5 प्रतिशत तक की निम्न दरें मिलीं, जबकि ई-टेंडरिंग में प्रतिस्पर्धा होने पर निगम का काफी पैसा बचता। इस सुनियोजित प्रक्रिया से निगम को करीब 9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। रोस्टर प्रणाली को ताक पर रखकर एक-एक ठेकेदार को 10-10 फाइलें आवंटित करने का भी आरोप लगाया गया। हालांकि नगर आयुक्त ने आरोपों को निराधार बताया था। चर्चा है कि मुख्यमंत्री से शिकायत की जाने के बाद दोनों के बीच में तनाव और गहरा गया है। सोमवार को मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने सुबह 11:00 बजे सदन की बैठक बुलाने के निर्देश दिए थे। इधर नगर निगम सचिवालय ने बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया। इसके बाद बिना किसी निर्धारित एजेंडे के सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सदन से नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल की अनुपस्थिति को पार्षदों ने अपमान करार देते हुए उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। मेयर ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि सदन की गरिमा सर्वोपरि है। अधिकारी का सदन से नदारद रहना जनप्रतिनिधियों की अनदेखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्षदों द्वारा हस्ताक्षरित इस निंदा प्रस्ताव को उचित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के नहीं आने का फोटो प्रमुख सचिव के पास भेज दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मंडलायुक्त से भी नगरायुक्त की शिकायत की थी। उन्होंने पत्रकारों के सामने यह भी कबूल किया है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार हो रहा है।











