आगरा। गैंग रेप और अपहरण जैसी गंभीर धारा में आरोप सिद्ध होने पर भी विवेचना में से उसे हटाने पर ट्रांस यमुना थाने के दरोगा को डीसीपी सिटी ने निलंबित कर दिया है। थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार पुलिस कमिश्नर को है। इसलिए उन्होंने उस पर कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख दिया है। पुलिस कमिश्नर उन्हें कब निलंबित करेंगे यह देखने वाली बात है।
ट्रांसयमुना क्षेत्र निवासी एक युवती 17 जून 2023 को लापता हुई थी। 12 जुलाई को उसकी मां ने ट्रांसयमुना थाने में कोचिंग संचालक सहित तीन लोगों के खिलाफ धारा 366 के तहत मुकदमा लिखाया गया। मुकदमा दर्ज होने के तीन दिन बाद युवती घर लौट आई। उसने जो कहानी अपने परिजनों को बताई उसे सुनकर घरवाले हैरान रह गए। उन्होंने बेटी के 164 के बयान दर्ज कराने के लिए कहा। पुलिस 164 के बयान दर्ज नहीं करा रही थी। तमाम शिकायतों के बाद विवेचक एसआई शिव मंगल ने चार सितंबर को युवती के 164 के कोर्ट में बयान दर्ज कराए। पांच सितंबर को बयानों का अवलोकन किया। मुकदमे में 376 डी की धारा बढ़ाई। एक आरोपित का नाम भी बढ़ाया। नया कोई साक्ष्य संकलित किए बिना छह अक्तूबर को चार्जशीट एसीपी छत्ता की पेशी में भेजी। मुकदमे से अपहरण और गैंगरेप की धारा हटता देखकर एसीपी हैरान हो गए। दरोगा ने चार्जशीट सिर्फ जानलेवा हमला और गाली-गलौज की धारा में लगाई थी। दरोगा ने तर्क दिया कि युवक-युवती में झगड़ा हुआ था। 112 नंबर पर सूचना दी गई थी। यह घटनाक्रम पुराना था। धारा हटाने के पीछे विवेचक के पास कोई ठोस साक्ष्य और आधार नहीं था। एसीपी छत्ता आरके सिंह ने विवेचक और थानाध्यक्ष के खिलाफ डीसीपी सिटी को गोपनीय रिपोर्ट दी थी। गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को डीसीपी सिटी सूरज राय ने विवेचक शिव मंगल को निलंबित कर दिया। थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर को लिखा है। केस डायरी थानाध्यक्ष ने अग्रसारित की थी। इसका मतलब होता है कि वह दरोगा द्वारा की गई विवेचना से सहमत थे। पुलिस कमिश्नर अब उन्हें कब निलंबित करेंगे यह देखने वाली बात होगी।











