-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। एक लाइन हाजिर सिपाही के ताजगंज क्षेत्र में कारखासी करने के कारनामे लखनऊ तक पहुंच गए हैं। पूर्व आईपीएस एवं आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उसकी शिकायत पुलिस आयुक्त से की है। यह पहला मामला नहीं है जब सिपाही आरोपों के कठघरे में है। इससे पहले भी शिकायतें हुईं हैं। मगर अधिकारियों की मेहरबानी के चलते कारखासी उसी के पास रही। सिपाही की ताजगंज में तूती बोलती है।
पूर्व एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने थानों से 41 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर किया था। यह वह पुलिस कर्मी थे जो कारखास थे। कहां से क्या आना है। किससे कितना मिलता है। इसका हिसाब-किताब इनके पास रहता था। 41 में से एक न्यू आगरा थाने में तैनात हो गया। शेष अभी भी पुलिस लाइन में हैं। इन्हें कोई नवीन तैनाती नहीं दी गई है। जिस सिपाही की शिकायत हुई है उसकी तैनाती लाइन में है मगर वहां उसकी तूती बोलती है। कब आता है कब जाता है। कोई नहीं पूछता। वर्दी वह पहनता नहीं। ताजगंज क्षेत्र में सक्रिय रहता है। वह वहां का कारखास है। लाइजनिंग के नाम पर सभी काम देखता है। शिकायत में लिखा गया सिपाही बड़ा जहाज नाम से चर्चित है। जानकारी करने पर पता चला कि पहले एक प्राइवेट व्यक्ति पुलिस की वसूली करता था। उसका नाम छोटा जहाज था। यह बसई चौकी पर ही रहता था। सिपाही ने जिम्मेदारी संभाली तो वह बड़ा जहाज बन गया। कमिश्नरेट में यह अकेला ऐसा सिपाही नहीं है। सिकंदरा थाने में भी कारखासी लाइन का एक सिपाही कर रहा है। सालों से सिकंदरा थाना क्षेत्र में वही कारखास है। लाइन हाजिर है। मगर थाना क्षेत्र से उसका मोह भंग नहीं हो रहा है। थाना क्षेत्र उसे इतना भा गया है कि अब तो वह क्रेटा से चलता है। कभी-कभी ब्रेजा गाड़ी लेकर आता है। पुलिस कर्मी तो यहां तक दावे करते हैं कि उसके तो ट्रक चल रहे हैं। जिसके साथ चल रहे हैं उसका नाम भी बताते हैं। हालांकि इसका पुलिस कर्मियों पर कोई प्रमाण नहीं है। सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस लाइन में इन सिपाहियों से काम क्या लिया जाता है। हाजिरी वहां लगती है तो किसके आदेश पर ये थाना क्षेत्रों में सुबह से सक्रिय रहते हैं। थाना क्षेत्र में घूमने की अनुमति कौन देता है। गणना कार्यालय में इनकी क्या सेटिंग हैं। शुक्रवार की परेड के समय ये कहां रहते हैं। इन सिपाहियों में ऐसा क्या खास है जो कोई थाना प्रभारी इन्हें आने से मना नहीं करता।











