आगरा। पुलिस की जानलेवा दबिश में अधिवक्ता की मौत होने के मामले में अधिवक्ता आज न्यायिक कार्य से विरत हैं। अधिवक्ताओं के द्वारा दीवानी के एक नंबर गेट को ताला लगाकर बंद कर दिया गया है और धरना शुरू कर दिया गया है। जिला जेल से बंदियों को लेकर गाड़ी न्यायालय में आई है उसे भी अधिवक्ता अंदर नहीं आने दे रहे हैं। न्यायिक अधिकारियों ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की है लेकिन वह नहीं मान रहे हैं। पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं। दोषी पुलिसकर्मियों को जेल भेजने और विवेचना सीबीआई से कराए जाने की मुख्य मांगे हैं।
अधिवक्ता सुनील शर्मा की पुलिस दबिश के दौरान आठवीं मंजिल से गिरकर मौत हुई है। पत्नी का कहना है कि पुलिस वालों ने जबरन मेरे घर का मुख्य द्वार तोड़ दिया तथा मेरे पति को घर के अंदर से जान से मारने की नीयत से गालियां देते हुए बराबर वाले फ्लैट में तेजी से ले गए। इसके साथ ही मुझे फ्लैट में बंधक बना दिया। 5-7 मिनट बाद ही मेरे पति के चीखने की आवाज आई तो मैं शोर मचाते हुए बाहर निकली तो 8-10 पुलिस वाले जिसमें राजीव सिंह, अनुराग सिंह अन्य पुलिस वाले थे, जो बगल वाले फ्लैट के कमरे में थे, मिलकर मेरे पति को फ्लैट नंबर 802 की बालकनी से नीचे फेंक रहे थे। मेरे शोर करने के बावजूद भी मेरे पति को आठवीं मंजिल से फेंक दिया। मामले में थानाध्यक्ष राजीव कुमार और चौकी प्रभारी अनुराग सिंह सहित 8-10 अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। रविवार को वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील शर्मा का शव घर पहुंचा तो पत्नी सुनीता बिलख पड़ीं थी। कहने लगीं कि पति को पुलिसवालों ने मारकर मेरी मांग उजाड़ दी। परिवारवालों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के सामने पुलिस पर कई आरोप लगाए। कहा कि 40 करोड़ की जमीन में से पुलिस को चार करोड़ मिलने वाले थे। मनोज ने यह आफर पुलिस वालों को दिया था। सुनील अधिकारियों से मिलकर आए थे। दीवानी में बैठ रहे थे। तब किसी ने थाने नहीं बुलाया। वह थाना न्यू आगरा पहले भी जा चुके थे। पुलिस ने अचानक दबिश क्यों दी? इसके बाद सुनील को मार दिया। वारंट तक नहीं लिया गया। पत्नी बोल रही थीं कि केस में एफआर लगा दी जाएगी।
शनिवार को उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति की बैठक हुई थी। इसमें निर्णय लिया गया था कि दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर दीवानी में अधिवक्ता कार्य से विरत रहेंगे। इसके साथ ही जुलूस निकालने के बाद धरना देंगे। आज सुबह 11:00 बजे के बाद अधिवक्ता एकत्रित होना शुरू हुए। वह गेट नंबर एक पर पहुंचे। यहां गेट पर अंदर से ताला लगा दिया गया। अधिवक्ताओं की मांग है कि विवेचना सीबीआई से होनी चाहिए। क्योंकि पुलिस इसमें कुछ नहीं करेगी। समस्त बार संघ के द्वारा मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र भी बनाया गया है। जिसमें कहा गया है कि एक मार्च की रात को पुलिसकर्मियों द्वारा अधिवक्ता सुनील शर्मा के फ्लैट पर दरवाजा तोड़ते हुए उन्हें आठवीं मंजिल से नीचे फेंक दिया, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। अधिवक्ता सुनील शर्मा के खिलाफ अगर कोई अपराध पंजीकृत था तो सर्वप्रथम नोटिस देकर अधिवक्ता को पूछताछ के लिए बुलाया जाना चाहिए था। इसके बाद न्यायालय से उनकी गिरफ्तारी का वारंट लिया जाना था। जैसा कि नहीं किया गया है। अधिवक्ताओं ने यह सवाल भी खड़े किए हैं कि पुलिसकर्मियों द्वारा सुनील शर्मा को प्राथमिक उपचार नहीं दिलाया गया। अगर उनकी मृत्यु मौके पर हो गई थी तो पंचनामा भर पुलिस द्वारा आस पड़ोस के लोगों को लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वास्तविकता यह है कि पुलिस ने सुनील शर्मा की बालकनी से फेंक कर हत्या की है। जैसा की वीडियो में प्रमाणित हो रहा है। इससे समूचे अधिवक्ता समाज में आक्रोश है। उपरोक्त घटना में दोषी पुलिसकर्मियों को शीघ्र से शीघ्र जेल भेजा जाए और विवेचना सीबीआई से कराई जाए। इधर कलेक्ट्रेट में भी अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया।











