-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। पुलिस दबिश के दौरान अधिवक्ता की हुई मौत के मामले में उनकी पत्नी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्नी का कहना है कि 40 करोड़ की जमीन में से पुलिस को चार करोड़ मिलने वाले थे। मनोज ने यह आफर पुलिस वालों को दिया था। उसे पता था कि जमीन में सुनील ही रोड़ा हैं। इसलिए उसने पुलिस से सेटिंग की। उन्हें रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ऑफर की वजह से बहुत तेजी दिखा रही थी। पत्नी के लगाए गए आरोप सुर्खियों में छाए हुए हैं।
अधिवक्ता सुनील शर्मा की पुलिस दबिश के दौरान आठवीं मंजिल से गिरकर मौत हुई है। पत्नी का कहना है कि पुलिस वालों ने जबरन मेरे घर का मुख्य द्वार तोड़ दिया तथा मेरे पति को घर के अंदर से जान से मारने की नीयत से गालियां देते हुए बराबर वाले फ्लैट में तेजी से ले गए। इसके साथ ही मुझे फ्लैट में बंधक बना दिया। 5-7 मिनट बाद ही मेरे पति के चीखने की आवाज आई तो मैं शोर मचाते हुए बाहर निकली तो 8-10 पुलिस वाले जिसमें राजीव सिंह, अनुराग सिंह अन्य पुलिस वाले थे, जो बगल वाले फ्लैट के कमरे में थे, मिलकर मेरे पति को फ्लैट नंबर 802 की बालकनी से नीचे फेंक रहे थे। मेरे शोर करने के बावजूद भी मेरे पति को आठवीं मंजिल से फेंक दिया। मामले में थानाध्यक्ष राजीव कुमार और चौकी प्रभारी अनुराग सिंह सहित 8-10 अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। रविवार को वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील शर्मा का शव घर पहुंचा तो पत्नी सुनीता बिलख पड़ीं। कहने लगीं कि पति को पुलिसवालों ने मारकर मेरी मांग उजाड़ दी। परिवारवालों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के सामने पुलिस पर कई आरोप लगाए। कहा कि 40 करोड़ की जमीन में से पुलिस को चार करोड़ मिलने वाले थे। मनोज ने यह आफर पुलिस वालों को दिया था। सुनील अधिकारियों से मिलकर आए थे। दीवानी में बैठ रहे थे। तब किसी ने थाने नहीं बुलाया। वह थाना न्यू आगरा पहले भी जा चुके थे। पुलिस ने अचानक दबिश क्यों दी? इसके बाद सुनील को मार दिया। वारंट तक नहीं लिया गया। पत्नी बोल रही थीं कि केस में एफआर लगा दी जाएगी।
एक के बाद एक जमीन के मामले में पुलिस आई सवालों के घेरे में
कमिश्नरेट बनने के बाद आगरा में जमीन संबंधी कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पुलिस कर्मियों की संलिप्तता पाई गई है। शाहगंज में पुलिस ने कुछ लोगों को बंधक बनाकर हवालात में उनकी पिटाई कराई इसके बाद जबरन तहसील में ले जाकर बैनामा करा दिया। इस गंभीर प्रकरण में भी इंस्पेक्टर पर सिर्फ लाइन हाजिर की कार्रवाई हुई। मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र में एक दुकान पर कब्जा कराने के लिए पुलिस ने पीड़ित पर ही एसिड अटैक सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले में इंस्पेक्टर पर निलंबन की कार्रवाई हुई लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। जगदीशपुरा में पुलिस ने 40 करोड रुपए की जमीन पर कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर पांच निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया। थानाध्यक्ष जेल में हैं लेकिन मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों को अभी तक लाइन हाजिर भी नहीं किया गया है। न्यू आगरा में अधिवक्ता को पकड़ने के लिए पुलिस इतनी उतावली क्यों थी? इस बात को लेकर भी तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।
कई थाना प्रभारी की एसीपी भेज चुके रिपोर्ट लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
कई एसीपी अपने सर्किल में पड़ने वाले थानों के थाना प्रभारी की कई मामलों में विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज चुके हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिस पर उनका मनोबल और बढ़ा हुआ रहता है। कई थाना प्रभारी की तो 4 से 5 जांच पेंडिंग में बताई जा रही हैं। यह अधिकारियों के ऑफिस में धूल फांक रही हैं।











