-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। पुलिस कमिश्नर ने कई बार मीटिंग में कहा है कि जुआ-सट्टा नहीं होना चाहिए। पुलिस की इसमें संलिप्तता नहीं रहनी चाहिए। फिर भी आगरा के थानों की पुलिस महीनेदारी के चक्कर में जुआ-सट्टा करा रही है। इसके लिए पुलिस कमिश्नर के निर्देश भी हवा में उड़ाए जा रहे हैं। ताजा मामला एत्माउद्दौला थाने का सामने आया है। यहां पर पुलिस की शह पर यमुना किनारे बड़ा जुआ चल रहा था। पुलिस की संलिप्तता सामने आने पर इंस्पेक्टर लाइन हाजिर, चौकी प्रभारी और कांस्टेबल निलंबित किए जा चुके हैं। चर्चा है कि अन्य थानों की पुलिस अभी भी नहीं चेती है। महीनेदारी के मोह में वह जुआ-सट्टा बंद नहीं करा पा रही। इधर पुलिस कमिश्नर ने भी कार्रवाई की डोर अब अपने हाथ में ले ली है। फाउंड्री नगर की तरह वह अन्य जगहों पर आइपीएस को भेजकर अपनी ही टीम से जुआ पकड़वाएंगे। संलिप्त पुलिसकर्मियों पर मुकदमा भी दर्ज कराएंगे।
पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड काफी सख्त अधिकारी हैं। उन्होंने चार्ज लेते ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुलिस पासपोर्ट-वेरीफिकेशन, जुआ सट्टा में संलिप्त नहीं रहे। उन्होंने जुआरियों और सटोरियों को थाने में बुलवाकर शपथ दिलाने के भी निर्देश दिए। कुछ थाना प्रभारी ने तो ऐसी दोस्ती निभाई की जुआरियों और सटोरियों को थाने में ना बुलाकर टेंपो रिक्शा वालों को शपथ दिला दी। वहीं जिस एत्माद्दौला थाने में दो दिन पहले जुआ पकड़ा गया है। उसी थाने में कुछ दिनों पहले दिन में शपथ दिलाई गई और रात में पुलिस ने जुआ लूट लिया। पुलिस कमिश्नर की कड़ी चेतावनी के बाद भी पुलिस नहीं सुधर रही है। इसके लिए वह और भी ज्यादा सख्त होने जा रहे हैं। उन्होंने भी अपने मंसूबे जाहिर कर दिए हैं अब सिर्फ कार्रवाई का डंडा चलेगा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दो महीने पहले अक्टूबर महीने में भी पुलिस कमिश्नर ने पुलिस अधिकारियों के ग्रुप पर भी लिखा था कि गैंबलिंग और सट्टा की शिकायत फिर से बढ़ गई है, क्या कारण है? आप लोग ढिलाई कर रहे क्या? क्रिमिनल्स की हिम्मत कैसे बढ़ गई? शहर और देहात में यह शिकायत बढ़ गई हैं। इसको दिखवाइए और जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का 100 प्रतिशत कंप्लायंस कराइये। सवाल यह है कि इतना कड़ा मैसेज लिखने के बाद भी पुलिस जुए और सट्टे में संलिप्त है। फाउंड्री नगर में भी यमुना किनारे जुआ पुलिस कमिश्नर ने ही पकड़वाया है। पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा था क्या मुझे सूची देनी पड़ेगी। कहां-कहां जुआ हो रहा है। यमुना किनारे जुआ होने के उनके पास पुख्ता सबूत थे। जो पुलिसकर्मी पैसा लेते हैं उनके भी नाम थे। उन्होंने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए आईपीएस आदित्य कुमार को जुआ पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी। एसीपी आदित्य कुमार ने एत्माउद्दौला थाना पुलिस को भनक भी नहीं लगने दी। उन्होंने एसओजी, सर्विलांस और कुछ पुलिसकर्मियों को एसीपी छत्ता कार्यालय पर एकत्रित किया। यहां से फूल प्रूफ प्लान के साथ वह जुआ पकड़ने के लिए निकले। स्टीमर भी बुलाई गई। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि एसीपी जुआ पकड़ने जाने वाले ही थे इतने में किसी पुलिस वाले ने सूचना लीक कर दी। इसके बाद जुआरियों में भगदड़ मच गई। कुछ जुआरी यमुना जी में तेरकर बल्केश्वर घाट की तरफ जाने लगे। उधर भी पुलिस की फील्डिंग लगी हुई थी। उधर की पुलिस ने कहा वापस चले जाओ। इसके बाद जुआरी वापस फाउंड्री नगर की तरफ ही आ गए और पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पकड़े जाने पर जब मुख्य जुआरी से पूछा गया जुआ कैसे होता है तो उसने सबसे पहले एक कांस्टेबल का नाम लिया। कहा कि उसे पैसा देते हैं। वह थाने में देता है। इसके बाद कांस्टेबल और चौकी प्रभारी पर निलंबन की कार्रवाई की गई और फिर डीसीपी की रिपोर्ट के बाद इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी पर। एत्माउद्दौला में जुआ पकड़ने के बाद भी अभी अन्य थानों की पुलिस पर कोई असर नहीं पड़ा है। शहर के कई थाना क्षेत्र में इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी को मोटा पैसा देकर जुआ-सट्टा कराया जा रहा है। कुछ ने तो अभी तक जुआ और सट्टा कराने में ही इतना मोटा पैसा कमा लिया है जितना पूर्व में उस थाने में रहे किसी थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी ने नहीं कमाया होगा। कुछ दिनों पहले सदर थाने में भी एक दरोगा ने पैसा लूटकर जुआ छोड़ दिया था। पुलिस कमिश्नर ने उस पर कार्रवाई कराई थी, उससे चौकी छीन ली थी। ऐसे थाने में पोस्ट कराया है जहां वह मक्खी मार रहा है।
क्रॉस मुकदमा दर्ज करने पर भी नाराज हैं कमिश्नर
थाना पुलिस के द्वारा मोटा पैसा देकर धुआंधार क्रास मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं। कई मामले संज्ञान में आने पर पुलिस कमिश्नर काफी नाराज हैं। उन्हें एक आदेश भी निकालना पड़ा है जिसमें उन्होंने लिखा है कि प्रायः देखने में आ रहा है कि कोई भी घटना घटित होने पर अभियोग पंजीकृत होने के बाद वादी पक्ष के विरुद्ध प्रतिवादी पक्ष के द्वारा अभियोग लिखाये जाने की कोशिश की जाती है। कुछ घटनाओं में प्रतिवादी उसके खिलाफ क्रॉस मुकदमा लिखवाने में कामयाब भी हो जाता है। इससे न्याय के सिद्धांत का हनन होता है। पीड़ित के साथ वास्तविक न्याय नहीं हो पाता, जिससे पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगते हैं। ऐसे में क्रॉस मुकदमा लिखने से पहले अपने जोन के डीसीपी से पूछा जाए।
कई थाना प्रभारी हट सकते जल्द
कई थाना प्रभारी की कार्यशैली की शिकायत अधिकारियों के पास हैं। जांच कराने पर यह दोषी भी पाए जा चुके हैं। बस कार्रवाई का इंतजार हो रहा है। विभाग में चर्चा है की जल्द ही इन्हें चार्ज से हटाया जा सकता है। एक थाना प्रभारी ने अपने थाने से गैंग छोड़ दिया। जांच अधिकारी ने उन्हें दोषी माना है। इस बात की भनक लगने पर वह एक अधिकारी के सामने जाकर खूब गिड़गिड़ाया। इसके बाद कार्रवाई थम गई। लेकिन अब उसके लगातार कोई ना कोई कांड करने की वजह से उसे हटाया जा सकता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसके शाम को 6:00 बजे ही शराब पीने की भी शिकायत एक अधिकारी के पास पहुंची थी। अधिकारी ने दरियादिली दिखाते हुए यह मैसेज कराया थोड़ा लेट पी लिया करो। इसके बाद उसके और भी ज्यादा दिमाग खराब हो गए। दूसरी ओर एक थाना प्रभारी भी एक मामले में दोषी पाए जा चुके हैं। छेड़खानी के मामले में विशेष संप्रदाय के युवक को उन्होंने थाने से पैसे देकर छोड़ दिया। जबकि एंटी रोमियो ने उसे थाने में बंद किया था। यह एक अधिकारी के पास लिफाफा लेकर भी पहुंचे थे। अधिकारी ने कहा यह क्या है तो वह बोले साहब महीने दारी है। इसके बाद अधिकारी ने जमकर डांट लगाई और कहा कि तुम्हारे दिमाग खराब है। किसने कहा मैं पैसा लेता हूं। कुछ समय बाद ही दूसरा प्रभारी भी पहुंच गया। वह भी लिफाफा लेकर गया था, उसको भी अधिकारी ने ऑफिस से भगाया। बाद में पता चला कि दोनों ही आपस में बात करते थे साहब को मिठाई देने चलेंगे। इनमें से एक प्रभारी कैसे बन गए इस बात पर थाने के पुलिसकर्मी भी हंसते हैं। स्थिति यह है कि इंस्पेक्टर साहब को कुछ नहीं आता है। एक महिला कांस्टेबल इंस्पेक्टर की विवेचना करती है।
तीसरी ओर एक इंस्पेक्टर अपने को गरीब बताकर धुआंधार वेटिंग कर रहे हैं। उन्होंने भी पुराने सभी कोतवालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। जमीनों पर कब्जे कराने में सुर्खियों में रहे हैं। एक इंस्पेक्टर की भी शिकायत काफी हैं। चार्ज पर रहने लायक उनके अंदर कोई गुण नहीं है। चर्चा है कि एक अधिकारी के गुरु के आगरा आने पर उनके आगे पीछे घूमकर उन्हें प्रसन्न कर दिया था। इसलिए वह हटाये नहीं जा रहे। इनके द्वारा जमकर वसूली की जा रही है। एक इंस्पेक्टर की भ्रष्टाचार को लेकर विजिलेंस जांच चल रही है, उनकी भी शासन में शिकायत हुई है जांच चलने पर वह कैसे चार्ज पर हैं। वहीं एक इंस्पेक्टर चांदी के राजीनामे में स्पेशलिस्ट बने हुए हैं।
अंडर ट्रांसफर चल रहे पुलिसकर्मियों की रवानगी नहीं करने वाले थाना प्रभारी रात को मिले चौराहे पर, मची खलबली
कई पुलिस कर्मियों का काफी समय पहले दूसरे थाने में स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन उनकी रवानगी नहीं हो रही। कई बार अभियान चला लेकिन इसमें थाना प्रभारी के लिए वसूली करने वाले रवाना नहीं किए गए। नए अपर पुलिस आयुक्त संजीव त्यागी के संज्ञान में जब यह मामला आया तो उन्होंने सभी थाना प्रभारी के लिए वायरलेस किया। उन्होंने सेट पर कहा कि अगर 24 घंटे के अंदर अंडर ट्रांसफर चल रहे पुलिस कर्मियों की रवानगी नहीं की गई तो रात में 10:00 बजे उसे थाने के थाना प्रभारी ताज व्यू चौराहे पर मिलें। इसके बाद सभी इंस्पेक्टरों के द्वारा रवानगी कर दी गई है।
जुआ और सट्टा में पुलिस की संलिप्तता मिलने पर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उनके ऊपर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
जे रविंदर गौड, पुलिस कमिश्नर

जुआ और सट्टा में पुलिस की संलिप्तता मिलने पर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उनके ऊपर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।









