आगरा। ट्रान्स यमुना थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े घर में घुसकर महिला से मारपीट कर आभूषण की लूट करने वाले बदमाश को पकड़ने की जगह उल्टा पीड़िता को परेशान किया जा रहा है। गुरुवार को दिनभर पुलिस ने पीड़ित परिवार से ही सवाल जवाब किए। इसके बाद पीड़िता और उनके पति काफी तनाव में है उन्हें लग रहा है उन्होंने पुलिस से शिकायत करके बहुत बड़ी गलती कर दी। दूसरी ओर पुलिस ने लूट की जगह छिनैती की धारा में मुकदमा दर्ज किया है।
कालिंदी विहार के बी-207 में राहुल कुमार शर्मा का परिवार रहता है। वह खंदौली स्थित पंजाब नेशनल बैंक में कैशियर हैं। सुबह बैंक गए थे। दो बच्चे हैं जिनके नाम प्रिंस और परी हैं। यह दोनों स्कूल गए थे। घर पर गृहस्वामिनी गुड़िया अकेली थीं। घर का काम कर रही थीं। कपड़े डालने छत पर गई थीं। तभी उन्होंने मेन गेट खुला देखा। वह नीचे आईं। कमरे के दरवाजे तक ही आ पाईं थीं एक बदमाश ने उन्हें दबोच लिया। युवक ने काले रंग का मास्क लगा रखा था। गुड़िया ने बताया कि बदमाश घसीटता हुआ उन्हें कमरे में ले गया। पलंग पर पटक दिया। चुन्नी से उनका गला घोंटने लगा। मंगलसूत्र खींचने लगा। पता नहीं कहां से उनमें हिम्मत आ गई। बदमाश के पूरी ताकत से एक लात मारी। बदमाश जमीन पर गिर पड़ा। उसके बाद उठा और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उनका मंगलसूत्र लूट लिया। कान के कुंडल उतरवा लिए। घटना की सूचना पर सिर्फ एक प्रशिक्षु दरोगा मौके पर गया। इंस्पेक्टर मौके पर ही नहीं गए। वह घटना को संदिग्ध मानते रहे। घटना भी देर रात अधिकारियों को बताई गई। इसके बाद गुरुवार सुबह छिनैती की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। इधर भारतीय न्याय संहिता में छिनैती की नई धारा जोड़ी गई है। इस धारा के तहत मुकदमा तब लिखा जाना है जब मोबाइल और पर्स छीनते समय बल का प्रयोग नहीं किया गया हो। ट्रांसयमुना थाना पुलिस ने तो कमाल ही कर दिया। पुलिस ने लूट नहीं छिनैती की धारा के तहत मुकदमा लिखा। छिनैती की धारा में तीन साल की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने घटना के समय कुछ नहीं किया। घटना के दूसरे दिन पुलिस ने छानबीन शुरू की। एक पुलिस कर्मी राहुल कुमार शर्मा की बैंक तक गया। पीड़िता गुड़िया शर्मा ने बताया कि पुलिस उनसे इस तरह बात कर रही थी जैसे उन्होंने झूठ बोला है। यह बोल रही थी कि पति की किससे रंजिश है। एक ही सवाल अलग-अलग पुलिस कर्मियों ने किया। वह परेशान हो गईं। राहुल कुमार शर्मा का कहना है कि मुकदमा लिखाकर उन्होंने भूल कर दी। ऐसा लग रहा है कि जैसे वे पीड़ित नहीं आरोपित हैं। इधर गुरुवार रात तक पीड़ित परिवार को एफआईआर की कॉपी भी नहीं दी गई है। जबकि पुलिस कमिश्नर के आदेश है कि एफआईआर की कॉपी पीड़ित के घर पर पहुंचाई जाए। लेकिन ट्रांस यमुना थाना पुलिस पुलिस कमिश्नर के आदेश को भी नहीं मानती।











