आगरा। फर्जी शस्त्र लाइसेंस गिरोह की मुख्यमंत्री और एसटीएफ से शिकायत करने पर पीड़ित को जेल से धमकी दिलाई गई थी। पीड़ित ने इस बात की एसटीएफ से शिकायत की। धमकी का ऑडियो भी सौंपा। एसटीएफ की जांच में धमकी की पुष्टि हुई। एसटीएफ ने मार्च 2025 में पुलिस आयुक्त को मुकदमा दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। एसटीएफ का पत्र एसीपी ने थाने में इंस्पेक्टर सिकंदरा नीरज शर्मा के पास भेजा। इंस्पेक्टर नीरज शर्मा ने एसटीएफ के पत्र को हवा में उड़ा दिया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा तक दर्ज नहीं किया। इसके बाद उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जांच होने पर उनकी गर्दन भी फंस सकती है।
नाई की मंडी थाने में 24 मई को अवैध शस्त्र और फर्जी लाइसेंस बनवाने के आरोप में सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज लगाने और आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें मोहम्मद जैद, नेशनल शूटर मोहम्मद अरशद, प्रापर्टी डीलर राजेश कुमार बघेल, भूपेंद्र सारस्वत, शिव कुमार सारस्वत, टीवी चैनल के पत्रकार शोभित चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त असलाह बाबू संजय कपूर नामजद हैं। विशाल भारद्वाज ने 26 सितंबर 2024 को एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अवैध विदेशी शस्त्रों की खरीद-फरोख्त और फर्जी लाइसेंस बनवाने वालों की शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि आरोपियों के संबंध जेल में बंद अपराधियों से भी हैं। फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद से वह रंजिश मान रहे हैं। आरोपित भूपेंद्र सारस्वत और उनके साथी उसकी भाड़े के हत्यारों से जान से मरवाने की साजिश रच रहे हैं। विशाल भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अलीगढ़ के कुख्यात सोनू गौतम को 20 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। उसने शूटर हरेंद्र राणा को पांच लाख रुपये एडवांस भी दे दिया गया था। सोनू गौतम ने जेल से उसके साथी को काल कर धमकी दी थी। उसका साथ नहीं देने की हिदायत भी दी। 19 सितंबर 2024 को एक अन्य ने भी विशाल को वाट्सएप एप काल कर सजग रहने के लिए कहा था। शिकायत में भूपेंद्र सारस्वत पर आरोप लगाए गए हैं। 12 मई 2024 को विशाल पर शास्त्रीपुरम स्थित गोल चक्कर पर कार में हमला हुआ था। हमलावरों ने हाथ-पैर तोड़ दिए थे। एसटीएफ ने मामले की जांच की। इसमें शिकायकर्ता ने लिखित बयान दिए कि भूपेंद्र सारस्वत और उसका साथ शोभित चतुर्वेदी विवादित जमीनों को खरीदते हैं। यह लोग शहर की महंगी जमीनें खरीदते हैं और सभी को अनैतिक लाभ पहुंचाते हैं। भ्रष्ट अधिकारी भी उनकी मदद करते हैं। जांच के बाद एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट छह मार्च 2025 को पुलिस आयुक्त को भेजी। पुलिस आयुक्त कार्यालय से अपर पुलिस आयुक्त कार्यालय और वहां से रिपोर्ट पुलिस उपायुक्त नगर के कार्यालय पहुंची। यहां से रिपोर्ट एसीपी हरीपर्वत के कार्यालय में पहुंची। सात अप्रैल को एसीपी हरीपर्वत ने सिकंदरा थाने को रिपोर्ट भेजते हुए तीन दिन में रिपोर्ट मांगी। मगर, इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब थाने से रिपोर्ट और अधिकारियों के पत्र ही गायब हो गए। मामले में पीड़ित के द्वारा एसटीएफ को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर सिकंदरा नीरज शर्मा के ऊपर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है। इसके साथ ही वह मुख्यमंत्री से उन्हें बर्खास्त करने की मांग को लेकर पत्र लिख रहे हैं। विशाल भारद्वाज का कहना है कि आरोपियों की मदद करने वाला भी मुजरिम होता है। इंस्पेक्टर सिकंदरा नीरज शर्मा ने आरोपियों की खुलकर मदद की है। मुकदमा दर्ज नहीं किया।
इधर फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। मंगलवार को आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी को पत्र लिखकर प्रकरण की जांच किसी एसीपी स्तर के अधिकारी से कराने की मांग की है। साथ ही पत्र में लिखा है कि यह प्रकरण बेहद गंभीर है। इसमें पहले अविलंब गिरफ्तारी हो। गैंगस्टर एक्ट लगे। आरोपित साक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं। रसूखदार हैं।
मुख्यमंत्री और एसटीएफ से शिकायत के बाद मुझे धमकी दिलाई गई। इस धमकी की एसटीएफ ने जांच की। जांच में धमकी की पुष्टि होने पर मुकदमा दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। इंस्पेक्टर सिकंदरा नीरज शर्मा ने इस पत्र को गायब कर दिया और आरोपियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनसे साठगांठ कर ली। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर सिकंदरा को बर्खास्त करने की मांग करूंगा। ऐसे अपराधियों की मदद करने वाले इंस्पेक्टर के ऊपर कार्रवाई होना आवश्यक है। इंस्पेक्टर पूर्व में भी कई बार विवादों में रहे हैं लेकिन अधिकारियों का संरक्षण मिलने के कारण वह हर बार कार्रवाई से बच जाते हैं।
विशाल भारद्वाज, पीड़ित

मुख्यमंत्री और एसटीएफ से शिकायत के बाद मुझे धमकी दिलाई गई। इस धमकी की एसटीएफ ने जांच की। जांच में धमकी की पुष्टि होने पर मुकदमा दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। इंस्पेक्टर सिकंदरा नीरज शर्मा ने इस पत्र को गायब कर दिया और आरोपियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनसे साठगांठ कर ली। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर सिकंदरा को बर्खास्त करने की मांग करूंगा। ऐसे अपराधियों की मदद करने वाले इंस्पेक्टर के ऊपर कार्रवाई होना आवश्यक है। इंस्पेक्टर पूर्व में भी कई बार विवादों में रहे हैं लेकिन अधिकारियों का संरक्षण मिलने के कारण वह हर बार कार्रवाई से बच जाते हैं।









