आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति का कार्यकाल एक अक्टूबर को खत्म होने जा रहा है। नए कुलपति की नियुक्ति के लिए कार्य परिषद से विश्वविद्यालय की तरफ से भी एक सदस्य नामित किया जाता है। विश्वविद्यालय की तरफ से जिस सदस्य को नामित किया गया है, उसको लेकर पूर्व विधिक सलाहकार डॉक्टर अरुण कुमार दीक्षित ने सवाल खड़े किए हैं और कुलाधिपति से शिकायत की है।
डॉ. अरुण कुमार दीक्षित ने कुलाधिपति से शिकायत की है कि 30 सितंबर 2025 को कुलपति का कार्यकाल खत्म हो रहा है। नए कुलपति के चयन के लिए आठ जून 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय को तत्काल कार्रवाई करते हुए कार्य परिषद की पूर्ण बैठक 15 दिन का नोटिस देते हुए बुलानी चाहिए थी, जिससे कार्य परिषद के सभी सदस्य खोज समिति के सदस्य के नामांकन के लिए पूर्ण तैयारी कर सकते तथा समाज के किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को नामांकित करने पर विचार करते। यह सदस्य 30 जून 2025 तक नामित हो जाना चाहिए था लेकिन विश्वविद्यालय की कुलपति द्वारा नियमानुसार बैठक आयोजित नहीं की गई। तीन जुलाई 2025 को कार्य परिषद की आकस्मिक बैठक आयोजित करने का नोटिस निकलवा कर पांच जुलाई को बैठक बुला ली। इस कारण सदस्यों को बैठक की तैयारी करने का समय ही नहीं मिला। आरोप लगाया गया है की बैठक में कुलपति ने अपने चेहते शिक्षकों के माध्यम से स्वयं को अधिकृत कर लिया कि वह नाम को राजभवन भेज देंगीं। तथा अगली कार्य परिषद की बैठक में सदस्यों को नाम बता दिया जाएगा। उसके बाद दो कार्य परिषद की बैठक हो चुकी है लेकिन बैठक में खोज समिति का सदस्य का नाम नहीं बताया गया है, जो कि नियमों का घोर उल्लंघन है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय की विद्या परिषद के सदस्य के रूप में प्रोफेसर नीलिमा सिंह को 20 जुलाई 2025 से तीन वर्ष के लिए नामित कर दिया गया है तथा विद्या परिषद की 26 जुलाई की बैठक में बुलाकर प्रोफेसर नीलिमा सिंह से कहलवाया गया है कि कुलपति बहुत अच्छा काम कर रही हैं तथा आगे भी 3 साल इनको यहां पर कुलपति के रूप में रहना चाहिए। आरोप लगाया गया है कि कुलपति ने प्रोफेसर नीलिमा सिंह का नाम खोज समिति की सदस्य के लिए राज भवन में भेज दिया, उन्होंने कुलपति प्रोफेसर आशु रानी के नाम को ही रिकमेंड कर दिया। एडवोकेट अरुण दीक्षित का कहना है कि खोज समिति का सदस्य विश्वविद्यालय से किसी भी प्रकार जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए, लेकिन कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने कुलाधिपति को धोखे में रखते हुए अपना दूसरा कार्यकाल निश्चित करने के लिए प्रोफेसर नीलिमा सिंह को नाम नामित कर दिया जो कि नियमों का उल्लघंन है।











