आगरा। स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े किसानों के अपमान और कथित राजद्रोह के मामले में गुरुवार को नाटकीय घटनाक्रम सामने आया। सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की ओर से पेश अधिवक्ता को न्यायालय के तीखे सवालों के बीच बार-बार माफी मांगनी पड़ी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई 2026 की तिथि निर्धारित करते हुए विपक्षी पक्ष को कुछ दस्तावेज प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।
स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान विपक्ष की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई गई। यह प्रार्थना पत्र 21 अप्रैल 2026 को कंगना रनौत की अधिवक्ता सुधा प्रधान द्वारा अधिवक्ता अनसूया चौधरी के माध्यम से दाखिल किया गया था। पत्र में आरोप लगाया गया था कि 3 अप्रैल 2026 को बहस पूरी होने के बाद 16 अप्रैल को निर्णय के लिए तिथि तय थी, लेकिन फैसला नहीं सुनाया गया और वादी पक्ष को आईटी एक्ट पर बहस का अतिरिक्त अवसर दिया गया। साथ ही 30 अप्रैल को निर्णय न सुनाने और विपक्ष को नए दस्तावेज पेश करने के लिए समय देने की मांग की गई थी।
वादी पक्ष ने बताया ‘झूठा और भ्रामक आरोप’
वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इसका कड़ा विरोध करते हुए जवाब दाखिल किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय पर उठाये गए सवाल पूरी तरह निराधार हैं। 16 अप्रैल को न तो आईटी एक्ट पर बहस हुई और न ही कोई मार्किंग की गई थी, बल्कि केवल दस्तावेजों को व्यवस्थित करने के लिए फ्लैग लगाए गए थे।
कॉपी न देने पर कोर्ट ने लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विपक्षी अधिवक्ता से पूछा कि 3 अप्रैल को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की प्रति वादी पक्ष को क्यों नहीं दी गई, जबकि कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे। इस पर अधिवक्ता कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं और स्वीकार किया कि कॉपी नहीं दी गई। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब आदेश में 16 अप्रैल को निर्णय की तिथि तय ही नहीं थी, तो प्रार्थना पत्र में ऐसा कैसे लिख दिया गया? क्या पत्रावली देखी गई थी? इन सवालों के बीच अधिवक्ता को कई बार माफी मांगनी पड़ी।
20 मई तक का समय, दस्तावेज पेश करने का मौका
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 तय करते हुए विपक्षी पक्ष को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया। साथ ही यह संकेत भी दिए कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।










