आगरा। न्यू आगरा थाने में खड़ा विशाल वृक्ष कटवाने का मामला सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी में पहुंच गया है। यह रातों-रात कटवाया गया था। मामले की जांच डीसीपी पूर्वी को सौंप दी गई। थानाध्यक्ष सहित कई पुलिसकर्मियों के बयान हुए। सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में सभी के अलग-अलग दोष निर्धारित किए गए। थानाध्यक्ष को भी दोषी पाया गया। पूरे विभाग में चर्चा थी कि थानाध्यक्ष पर इस बार जरूर गाज गिरेगी उसे बचाया नहीं जाएगा। लेकिन एक बार फिर सख्त कार्रवाई से बचाने के लिए उनका थाना बदल दिया गया। वह अन्य थानों की तरह इस थाने में भी चंद दिन ही रह पाए। सवाल खड़े हो रहे हैं अगर वह काबिल हैं तो 5 महीने में चार थाने क्यों बदल दिए गए? और अगर काबिल नहीं है तो उन पर कृपा क्यों बरसाई जा रही है? डीसीपी ने भी अपनी रिपोर्ट में उन्हें दोषी माना है। गुरुवार को ही रिपोर्ट दी है फिर भी थाना मिल गया।
27 मार्च की रात न्यू आगरा थाने में रात में मजदूर बुलाकर पेड़ जड़ से कटवा दिया गया था। पेड़ सालों पुराना था। पेड़ कटवाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। पेड़ काटने के दौरान थानाध्यक्ष योगेश कुमार खुद सादा कपड़ों में थाने के बाहर खड़े हुए थे। इस मामले ने तूल पकड़ा। लोगों ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर सवाल उठाए। वन विभाग को भी कठघरे में खड़ा किया। मामले की जांच डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल को सौंपी। चर्चा है की जांच के दौरान थाने में बलि का बकरा खोजा गया कि किस पर गाज गिराई जाए। इधर थानाध्यक्ष योगेश नागर ने अधिकारियों को रिपोर्ट दी कि थाना वर्ष 2013 से चौकी डिवीजन परिसर में चल रहा है। गोपनीय पुस्तिका में यह दर्ज है। तत्कालीन चौकी प्रभारी डिवीजन सोनू कुमार को यह पता चला तो उनके होश उड़ गए। वह समझ गए बलि का बकरा उन्हें बनाया जा रहा है, लेकिन किस्मत अच्छी थी जिस दौरान पेड़ काटा जा रहा था उनकी कानून व्यवस्था में ड्यूटी ताजगंज थाने में थी। डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल ने अपनी जांच में कई लोगों को दोषी ठहराया। इसमें थानाध्यक्ष योगेश कुमार को भी शामिल किया। वह थाने के प्रभारी हैं और मौके पर भी खड़े हुए थे इसलिए उनकी तो पूरी जिम्मेदारी बनती भी थी। इस मामले में ऊपर तक रिपोर्ट भेजी जानी है। इधर आनन-फानन में गुरुवार को थानाध्यक्ष न्यू आगरा योगेश कुमार को थानाध्यक्ष रकाबगंज बना दिया गया। थानाध्यक्ष रकाबगंज निशामक त्यागी को न्यू आगरा भेजा गया है। आदेश की जानकारी होते ही उन पुलिस कर्मियों के होश उड़ गए पेड़ काटने के जांच के दौरान जिनके बयान दर्ज हुए थे। सभी आपस में चर्चा कर रहे हैं कि थानाध्यक्ष ने तो खुद को बचा लिया। कहीं ऐसा न हो उन्हें बलि का बकरा बना दिया जाए। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। यह पेड़ उन पुलिस कर्मियों को बहुत महंगा पड़ेगा जो दोषी ठहराए जाएंगे। पुलिस कर्मी खुद ही मौके के फोटो वायरल कर रहे हैं। लाल घेरा बना रहे हैं। यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं कि उस समय थानाध्यक्ष योगेश नागर खुद मौजूद थे। पूरी जिम्मेदारी तो उसकी होनी चाहिए। थानाध्यक्ष ही जब पेड़ कटवाएगा तो कौन रोक पाएगा।
24 नवंबर 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक चार थाने बदल गए
दरोगा योगेश नागर को एक मई 2025 को एसओ डौकी बनाया गया था। फतेहाबाद के भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा ने उनकी कार्यशैली की मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कई शिकायतें कीं थीं। 24 नवंबर को उन्हें हटा दिया गया। 24 नवंबर 2025 को एसओ कमला नगर बना दिया गया। यहां वह चंद दिन ही रह पाए। 13 जनवरी 2026 को उन्हें हटा दिया गया। यहां से उन्हें पर्यटन थाने में थानाध्यक्ष बनाकर भेज दिया गया। यहां से भी महज 38 दिन में हटा दिया गया। 23 फरवरी को उन्हें एसओ न्यू आगरा बनाया गया। 30 अप्रैल ( आज) यहां से भी हटा दिया गया। अब उन्हें एसओ रकाबगंज बनाया गया है। अगर वह अधिकारियों की नजर में बहुत काबिल हैं तो एक जगह टिक क्यों नहीं पा रहे हैं। विभाग में पुलिसकर्मी भी एक दूसरे से यही सवाल पूछ रहे हैं।










